चीन के सहारे नहीं

बिना अपनी जमीन तैयार किए चीन की आपूर्ति शृंखला से जुड़कर विकसित होने की सोच समस्याग्रस्त है। विकास के लिए भारत को आखिरकार अपना मॉडल और अपनी सीढ़ी तैयार करनी ही होगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अनंत गोयनका की ये राय अहम है कि भारत को चीन से बचने… Continue reading चीन के सहारे नहीं

मानक इतना ना गिराएं

क्या अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को “अंतिम रूप देने” के क्रम भारत अमेरिका को इस बात पर राजी कर पाएगा कि वह दोनों देशों के कारोबार में गैर-व्यापार बाधाएं खड़ी ना करे? भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को “अंतिम रूप देने” के लिए अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर भारत में हैं।… Continue reading मानक इतना ना गिराएं

सिक्युरिटी स्टेट’ के ‘बंकर’

समस्या यह धारणा है कि परीक्षा तंत्र अकुशलता और भ्रष्टाचार के ग्रस्त है। इससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हुआ है। परीक्षा केंद्रों को ‘बंकर’ में तब्दील करने से यह धारणा दूर नहीं होगी।    पेपर लीक के बाद दोबारा हुए नेशनल एलिजिबिलिटी- कम- एंट्रेस टेस्ट (स्नातक पूर्व) के लिए देश में बने 5,440 परीक्षा केंद्रों पर… Continue reading सिक्युरिटी स्टेट’ के ‘बंकर’

सिर्फ इरादा काफी नहीं

क्या अपनी खास जरूरतों के मुताबिक एआई का संप्रभु सिस्टम एवं प्रतिमान विकसित करने की दिशा में भारत बढ़ रहा है? जियो का प्रस्तावित ‘संप्रभु एआई बैकबॉन’ क्या इस कमी को पूरा कर पाएगा? रिलायंस जियो ने भारत की “संप्रभु आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) रीढ़” निर्मित करने का इरादा जताया है। कंपनी की 49वीं वार्षिक आम… Continue reading सिर्फ इरादा काफी नहीं

कैश ट्रांसफर की कीमत

सरकारों का ऋण लेना अपने-आप में समस्या नहीं है, बशर्ते निवेश उत्पादक योजनाओं या दीर्घकालिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में हो। मगर, फिलहाल ज्यादातर रकम का इस्तेमाल नकदी ट्रांसफर के लिए हो रहा है। वोट खरीद योजनाएं का असर जाहिर होने लगा है। पिछले वित्त वर्ष में राज्य सरकारों ने बाजार से 15.2 फीसदी ज्यादा कर्ज… Continue reading कैश ट्रांसफर की कीमत

रैंकिंग से सोचें आगे

वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स का अपना महत्त्व है। इसलिए उन पर गौर किया जाना चाहिए। लेकिन कृत्रिम ढंग से उनमें दर्जा बढ़ाने की कोशिशें हानिकारक हैं। फिर रैंकिंग्स में उभरने वाली छवि से बंध जाना सही सोच नहीं है। यह अच्छी खबर है कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ी है। 500… Continue reading रैंकिंग से सोचें आगे

तैयारी क्या है?

इस बार मॉनसून कमजोर रहने की आशंका है। इस चुनौती के मद्देझनर सरकार ने क्या एहतियातन कदम उठाए हैं, इस बारे में उसे देश को भरोसे में लेना चाहिए, ताकि लोग घबराहट से बच सकें। मौसम को लेकर आशंकाएं बढ़ रही हैं। आधा जून गुजर चुका है और अटके मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना… Continue reading तैयारी क्या है?

अक्षमता का प्रदर्शन

जिस दौर में संचार माध्यमों की भरमार है और किसी भी प्रतिबंधित ऐप का इस्तेमाल वीपीएन पर जाकर किया जा सकता है, तब एक ऐप को प्रतिबंधित करने का क्या तुक हो सकता है? अनुमान लगाना कठिन है कि भारत सरकार के कर्ता-धर्ता सचमुच यह मानते हैं कि कुछ दिखावटी कदमों का एलान कर देने… Continue reading अक्षमता का प्रदर्शन

बेतुकेपन का रंगमंच

लोकतंत्र में लोकलाज का परदा उतार फेंका जाए, तो फिर बेपदर्गी किस हद तक जाएगी, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है। तब राजनीति बेतुकेपन का रंगमंच बन जाती है, जो आज हमारी हकीकत है। एक राजनीतिक दल, जिसके बारे में कहीं जाना-सुना नहीं गया हो और अपने पूरे चुनावी इतिहास में जिसने एक हजार… Continue reading बेतुकेपन का रंगमंच

पाक का क्या बनेगा?

कोई देश बड़ा भू-राजनीतिक मूल्य रख सकता है। मगर उसके साथ ही अपने राष्ट्रीय विकास की क्षमता के अभाव से वह ग्रस्त भी बना रह सकता है। पाकिस्तान इस विडंबना का नायाब उदाहरण है। ईरान- अमेरिका के बीच समझौता कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा कर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। उसके योगदान की… Continue reading पाक का क्या बनेगा?

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