जीडीपी की नई सीरीज

शुरुआती धारणा यह बनती है कि सरकार ने अपने आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय बनाने की कोशिश की है। संभवतः यह आईएमएफ के निर्णय का असर है, जिसके तहत उसने भारत के आर्थिक आंकड़ों को सी ग्रेड में डाल दिया था। सकल घरेलू उत्पाद की गणना की नई सीरीज के तहत इस वर्ष का अनुमान जारी… Continue reading जीडीपी की नई सीरीज

युद्ध के मकड़जाल में?

खामेनई के उत्तराधिकारियों ने चंद घंटों के अंदर जिस तरह इजराइल के अंदर तथा विभिन्न खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य एवं अन्य ठिकानों को निशाना बनाया, उसका यही पैगाम है कि ईरान ने लंबी लड़ाई की तैयारी कर रखी है। विडंबना ही है कि जिस सुबह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ ओमान के विदेश… Continue reading युद्ध के मकड़जाल में?

बदनीयती से हटता परदा

हालिया न्यायिक निर्णयों ने इस धारणा की पुष्टि की है कि सरकारी एजेंसियों का राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल हुआ। जिन साक्ष्यों के आधार पर अभियोग दर्ज हुए, उनका सख्त न्यायिक परीक्षण हुआ, तो अधिकांश मामलों में वे टिक नहीं पाए। कथित शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 23 अन्य… Continue reading बदनीयती से हटता परदा

न्यायिक प्रतिष्ठा की चिंता

क्या अब ये बात भरोसे के साथ कही जा सकती है कि न्यायपालिका ने अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा कर ली है? आखिर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की धारणा इस हद तक क्यों पहुंच गई कि पाठ्य-पुस्तक में उसका जिक्र होने लगा? एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों के जिक्र से… Continue reading न्यायिक प्रतिष्ठा की चिंता

समझौते का क्या औचित्य?

इस दौर में अमेरिका के साथ हुए हर समझौते के टिकाऊपन पर हमेशा राष्ट्रपति ट्रंप के मूड की तलवार लटकी रहती है। फिर अमेरिका के भीतर स्थितियां अस्थिर हैं। ट्रंप के कदमों पर वहां राजनीतिक आम सहमति नहीं है। अमेरिका ने अब भारत से सौर ऊर्जा से संबंधित पाट-पुर्जों के आयात पर 126 प्रतिशत टैरिफ… Continue reading समझौते का क्या औचित्य?

आम समझ के बाहर

शर्टलेस प्रतिरोध मामले में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक षडयंत्र और दंगे में शामिल होने से जुड़ी धाराएं लगाईं। हैरतअंगेज है कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन आरोपों में दम माना और प्रदर्शनकारियों को पुलिस रिमांड में भेज दिया। लोकतांत्रिक दायरे में हुए प्रतिरोध में शामिल व्यक्तियों को पुलिस रिमांड में भेजा जाए,… Continue reading आम समझ के बाहर

संदेह का समाधान नहीं

क्या एसआईआर के बाद पश्चिम बंगाल में ऐसी मतदाता सूची सामने आ पाएगी, जिस पर तृणमूल कांग्रेस सहित तमाम दलों एवं हितधारकों को यकीन हो? ऐसा नहीं हुआ, तो जाहिर है, विधानसभा चुनाव संदेह के साये में होगा। तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर चप्पे-चप्पे निगरानी… Continue reading संदेह का समाधान नहीं

नीति बनाम नीयत

भारत सरकार ने अपने आतंकवाद विरोधी रणनीति पत्र में ध्यान दिलाया है कि कुछ देशों ने आतंकवाद का इस्तेमाल राजकीय नीति के बतौर किया। इसके बावजूद भारत की राय है कि आतंकवाद किसी विशेष मजहब, नस्ल, राष्ट्रीयता, या सभ्यता से संबंधित नहीं है। काबिले-ए-तारीफ है कि भारत सरकार ने आतंकवाद विरोधी नीति एवं रणनीति की… Continue reading नीति बनाम नीयत

अदालत का दायरा

बदले राजनीतिक माहौल में अदालतें न्यायिक सक्रियता दिखाने में खुद को असमर्थ पा रही हैँ, तो समाज का एक हिस्सा इसे दायित्व निर्वहन से मुंह मोड़ना मानेगा। बहरहाल, संदेश यही है कि राजनीतिक प्रश्नों का न्यायिक उत्तर ढूंढना आलसी नजरिया है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने स्वीकार किया है कि कथित गौ-रक्षकों की अवैध… Continue reading अदालत का दायरा

पेटेंट का पैमाना

ज्यादा चर्चा गलगोटिया के गड़बड़झाले की ही हुई है, लेकिन बाकी अनेक निजी विश्वविद्यालयों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। उन्होंने भी वास्तविक अनुसंधान और आविष्कार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय चौंकाने वाली सुर्खियां बनाने की रणनीति अपना रखी है। एआई समिट के दौरान गलगोटिया विश्वविद्यालय को लेकर उठे विवाद का अच्छा असर यह… Continue reading पेटेंट का पैमाना

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