नैसकॉम पर नज़र

एआई के नए टूल्स आने से ना सिर्फ भारतीय टेक क्षेत्र, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था पर आशंकाएं मंडरा रही हैं। गौरतलब है कि गुजरे तीन दशकों में भारत में टेक सेक्टर उपभोक्ता मध्य वर्ग निर्मित करने वाला प्रमुख कारोबार रहा है। जिस समय बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भाव में गिरावट का सिलसिला थम नहीं रहा… Continue reading नैसकॉम पर नज़र

एआई घोषणापत्र का सार

डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन एआई पर किसी प्रकार के लगाम के खिलाफ है। उसके मुताबिक इस तकनीक की राह में नियम-कायदे जैसी रुकावटें नहीं होनी चाहिए। नई दिल्ली घोषणापत्र में इसी नजरिए को जगह मिली। यानी यह ट्रंपकालीन एआई घोषणापत्र है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) पर हुए पहले तीन शिखर सम्मेलनों (लंदन, सियोल और परिस) में मुख्य… Continue reading एआई घोषणापत्र का सार

अगर साहस हो तो

नए हालात भारत को अवश्य ही नए व्यापार समझौते पर जोर देना चाहिए। उसे ये धारणा मजबूत नहीं होने देना चाहिए कि ट्रंप के पास कुछ ऐसे छिपे तीर हैं, जिनके भय से भारत सरकार उनकी हर शर्त मान रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ वॉर का पूरा संदर्भ बदल गया… Continue reading अगर साहस हो तो

एआईः भय या भाग्य?

भारत एआई क्रांति में अग्रणी तब होगा, जब उसका अपना लार्ज लैंग्वेज मॉडल होगा और उस पर आधारित प्लेटफॉर्म होंगे, जिनका इस्तेमाल भारत के लोगों के साथ साथ दुनिया के लोग भी करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो यहां भी हम सेक्टर स्पेशिफिक एप्लीकेशन बनाते रह जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट… Continue reading एआईः भय या भाग्य?

ईरान में अमेरिका क्या करेगा

अमेरिका ने ईरान के आसपास दो बड़े युद्धपोतों की तैनाती की है और उसके बाद लड़ाकू विमानों की अग्रिम तैनाती पश्चिम एशिया में कर दी है। हालांकि आम तौर पर इस तरह की सैन्य गतिविधियां प्रत्यक्ष युद्ध की घोषणा नहीं होतीं, बल्कि प्रतिरोधक शक्ति का प्रदर्शन होती हैं। अमेरिका क्या ईरान में युद्ध छेड़ेगा? अमेरिका… Continue reading ईरान में अमेरिका क्या करेगा

नया सामरिक सहयोगी फ्रांस

राष्ट्रपति मैक्रों ने मुंबई में कहा भी कि फ्रांस भारत पर भरोसा करता है इसलिए उसे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में कोई समस्या नहीं है।  इसलिए आगे का सवाल है कि क्या फ्रांस, भारत के लिए रूस जैसा सामरिक सहयोगी बन सकता है? फ्रांस क्या भारत के लिए नया रूस हो सकता है? य़ह लाख टके का… Continue reading नया सामरिक सहयोगी फ्रांस

बांग्लादेश से संबंध

बांग्लादेश के साथ भारत की कूटनीति का तीसरा पहलू क्षेत्रीय भू राजनीति से जुड़ा है। बांग्लादेश भारत की पड़ोसी पहले की नीति का मुख्य केंद्र रहा है। कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सहयोग, जल बंटवारा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की परस्पर निर्भरता गहरी है। शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की भारत की विदेश नीति पिछले… Continue reading बांग्लादेश से संबंध

ओपन सोर्स का झटका

लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर पैनल का आविष्कार अमेरिका में हुआ, लेकिन उनमें कारोबारी दौड़ चीन ने जीती। हाई-टेक चमत्कार को उसने सस्ते माल में बदल दिया, जिससे पश्चिमी कंपनियां होड़ से बाहर हो गईं। चीन यही नजरिया एआई क्षेत्र में अपना रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट की शुरुआत से ठीक पहले चीन की कंपनी बाइटडांस… Continue reading ओपन सोर्स का झटका

अनिश्चय से परेशान यूरोप

यूरोपीय देशों की मुश्किल यह है कि अमेरिका का साया उन पर नहीं रहा, रूस से उनकी दुश्मनी है, और चीन को वे अपने आर्थिक हितों के लिए खतरा मानते हैं। जबकि आज की दुनिया में यही सबसे बड़ी ताकतें हैं। पिछले महीने दावोस में हुए वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम के बाद अब जर्मनी में हुए… Continue reading अनिश्चय से परेशान यूरोप

राफेल पर ही दांव

बड़ी ताकतें अपनी कंपनियों को सौदा दिलवाने के लिए भारत को महज एक बाजार के रूप में देखती हैं। मगर भारत को उनके दबाव में नहीं आना चाहिए। यह भी जरूरी है कि सौदा पारदर्शी हो, ताकि उसको लेकर विवाद पैदा ना हो। फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का फैसला तत्कालीन यूपीए सरकार… Continue reading राफेल पर ही दांव

logo