विराम के बाद युद्ध?

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अमेरिका ने ऐसा रुख अपनाया है, जैसे दोनों पक्षों के बीच युद्ध कभी हुआ ही नहीं हो! उधर ईरान का नजरिया है कि 39 दिन के युद्ध ने समीकरण बदल दिए हैं और वह अपनी बात मनवाने की स्थिति में है।

ईरान और अमेरिका/ इजराइल के शांति समझौते की दिशा में बढ़ने की जागी उम्मीद पर जल्द ही पानी फिर गया। ईरान के होरमुज डलडमरूमध्य को फिर से बंद करने के बाद अब दोनों तरफ से मोर्चाबंदी तेज होने की खबरें हैं। लेबनान में युद्धविराम लागू होने और उसके बाद ईरान के होरमुज जल मार्ग को खोलने का एलान करते ही जिस तरह डॉनल्ड ट्रंप ने ताबड़तोड़ सोशल मीडिया पोस्ट डाले, संकेत हैं कि उनसे बात फिर बिगड़ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संभवतः वैसे दावे भी कर दिए, जिन पर सहमति नहीं बनी थी और जिनसे ईरान के समर्पण कर देने का संदेश जाता था।

नतीजतन, ईरान ने जवाबी कार्रवाई कर दी। वैसे भी दोनों पक्षों के आकलन में खाई इतनी चौड़ी है कि किसी जल्द समाधान की गुंजाइश नहीं बनती। पहले इस्लामाबाद में हुई प्रत्यक्ष वार्ता और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में जारी परोक्ष बातचीत में अमेरिका ने इस तरह रुख अपनाया है, जैसे दोनों पक्षों के बीच युद्ध कभी हुआ ही नहीं हो! उधर ईरान का नजरिया ऐसा है कि 39 दिन के युद्ध ने समीकरण बदल दिए हैं और अब वह अपनी बातें मनवाने की स्थिति में है। ईरान इस नतीजे पर था कि उसके दबाव में अमेरिका ने लेबनान में युद्धविराम के लिए इजराइल को मजबूर किया। इसके बाद होरमुज जल मार्ग को सशर्त खोल कर उसने अगली सौदेबाजी की जमीन तैयार की।

मगर, ट्रंप ने होरमुज की नौसैनिक घेराबंदी जारी रखने का एलान कर ईरान के इस कदम को निष्रभावी कर दिया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम किसी अन्य देश को सौंपने पर राजी हो गया है। संकेत हैं कि इससे ईरान में इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आआरजीसी) और सख्त रुख रखने वाले अन्य समूहों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। इससे कूटनीतिक नजरिया अपना रहे ईरानी अधिकारी सख्त रुख अपनाने पर मजबूर हो गए। इस तरह फिर से युद्ध का साया लौट आया है। ये लड़ाई दुनिया में गंभीर किस्म का ऊर्जा एवं आर्थिक संकट पहले ही खड़ा कर चुकी है। अब ये फिर तेज हुई, तो संकट और भयानक रूप ग्रहण कर सकता है।


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