केंद्र में पहली बार सरकार बनाने के बाद ही नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग का नाम बदल कर नीति आयोग किया था। उसके बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि नीति आयोग की गवर्निंग कौंसिल की बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं। इससे पहले हर बार दो या तीन मुख्यमंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं आते थे। कम से कम तीन तो मुख्यमंत्री ऐसे थे, जो ऐसी बैठकों से दूर रहते थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी और ओडिशा के नवीन पटनायक। ज्यादातर मामलों में इनकी ओर से कोई दूसरा मंत्री बैठकों में शामिल होता था। अब इन तीनों राज्यों में सत्ता बदल चुकी है।
पहले ओडिशा में सत्ता बदली और 25 साल के बाद नवीन पटनायक मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटे। उनकी जगह भाजपा के मोहन चरण मांझी सीएम बने। इस साल दो और राज्यों में बदलाव हो गया। अप्रैल में बिहार में नीतीश कुमार की जगह सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए और मई में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जगह भाजपा के शुभेंदु अधिकारी सीएम बन गए। उधर तमिलनाडु में भी बदलाव हो गया है और एमके स्टालिन की जगह विजय सीएम हैं। सो, इस बार सब मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए। वैसे भी एक एक करके सभी राज्यों में भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टियों के मुख्यमंत्री बनते जा रहे हैं तो फिर दिल्ली के बुलावे पर या दिल्ली की बैठक में सबका शामिल होना अनिवार्य ही होगा।
