समाज तोड़ने वाली बात

Categorized as संपादकीय

किसी राज्य से लिया गया ड्राइविंग लाइसेंस पूरे भारत में मान्य होता है। ऐसे में, भाषा बोलने- पढ़ने की क्षमता के आधार पर किसी राज्य में उसकी मान्यता खत्म करना विवादास्पद एवं आपत्तिजनक सोच है। संभवतः यह अवैध भी है।

टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा में निपुण होने की शर्त लागू कर महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय एकता की भावना को आघात पहुंचाया है। देश के किसी हिस्से में जाकर रोजी-रोटी कमाने के नागरिकों के मूलभूत संवैधानिक अधिकार के खिलाफ तो यह कदम है ही। इसे भाषा या क्षेत्र के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव करना भी माना जाएगा। राज्य सरकार के निर्णय के मुताबिक अगले एक मई से ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए यह अनिवार्य हो जाएगा कि वे धारा-प्रवाह मराठी बोलें और मराठी भाषा को पढ़ सकें।

जो ड्राइवर इसमें फेल होंगे, उन्हें राज्य में टैक्सी या ऑटो नहीं चलाने दिया जाएगा। आगे से किसी ऐसे व्यक्ति को राज्य में इस काम की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसमें भाषा संबंधी उपरोक्त क्षमता ना हो। राज्य सरकार के 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और उप-कार्यालय खास सत्यापन अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इस दौरान देखा जाएगा कि ड्राइवर प्रभावी ढंग से मराठी बोलने, लिखने, और पढ़ने में सक्षम हैं या नहीं। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा है कि जो ड्राइवर वेरिफिकेशन में फेल होंगे, उनके लाइसेंस और परमिट रद्द कर दिए जाएंगे। मगर, मुद्दा है कि क्या ऐसा करना वैधानिक है? किसी राज्य से लिया गया ड्राइविंग लाइसेंस पूरे भारत में मान्य होता है।

ऐसे में, भाषा बोलने- पढ़ने की क्षमता के आधार पर किसी राज्य में उसकी मान्यता खत्म करना विवादास्पद एवं आपत्तिजनक सोच है। अगर ऐसी ही सोच से दूसरे राज्य भी प्रेरित हुए, तो मराठी भाषी सहित तमाम इलाकाई लोगों के लिए अन्य क्षेत्रों में मुश्किल खड़ी हो सकती है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक महाराष्ट्र में 65 से 70 प्रतिशत टैक्सी-ऑटो ड्राइवर अन्य राज्यों के हैं। वे वहां वर्षों से काम कर रहे हैं, तो जाहिर है कि वे आम जन से संवाद करने लायक भाषा जानते- समझते हैं। भाषा जानने और सीखने का संबंध काफी हद तक रोज-रोटी के तकाजों से जुड़ा होता है। देवेंद्र फड़णवीस सरकार इस बुनियादी बात की उपेक्षा कर रही है। अतः उचित होगा कि समाज को तोड़ने वाले इस कदम को वह वापस ले ले।


Previous News Next News

More News

तीन आदिवासी बालिकाओं की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण, कठोर कार्रवाई हो: दिग्विजय सिंह

June 3, 2026

राज्यसभा सांसद एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के अंतर्गत आदिवासी बहुल ग्राम सगौर में कुएं में डूबने से तीन नाबालिग आदिवासी बालिकाओं की हुई दर्दनाक मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही एवं पेयजल व्यवस्था की विफलता का गंभीर उदाहरण बताते…

कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री बने डीके शिवकुमार, भव्य समारोह में ली शपथ

June 3, 2026

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने बुधवार को राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। बेंगलुरु स्थित लोक भवन परिसर के ग्लास हाउस में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल थावरचंद्र गहलोत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समर्थकों के नारों के बीच डी.के. शिवकुमार मंच पर पहुंचे और सबसे पहले…

परिसीमन बिल आएगा तो अब क्या होगा?

June 3, 2026

केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी कर रही है। पिछली बार भी इसे परिसीमन के नाम पर नहीं लाया गया था। तब भी महिला आरक्षण के लिए बने नारी शक्ति वंदन कानून के साथ इसे जोड़ा गया था। संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद सरकार ने सत्रावसान नहीं करके…

विपक्ष की कमान कांग्रेस के हाथ में

June 3, 2026

विपक्षी पार्टियों को इसका अंदाजा है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल लाना चाहती है। संविधान के 131वें संशोधन बिल के जरिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करना चाहती है और सीटें बढ़ा कर 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना चाहती है। विपक्ष ने पिछली बार इसे रोक दिया था।…

हिमाचल में कांग्रेस के सामने बड़ी समस्या

June 3, 2026

सब जगह सत्तारूढ़ पार्टियां स्थानीय निकायों के चुनाव जीत रही हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है। इससे पहले गुजरात में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था। तेलंगाना में ऐसे ही कांग्रेस ने बहुत बड़ी जीत हासिल की थी। एक केरल अपवाद था, जहां सत्तारूढ़ वाम मोर्चा को कांग्रेस ने…

logo