इम्पैक्ट एआई समिट का

बेशक, नई दिल्ली में इस इवेंट का आकार पिछले तीन शिखर सम्मेलनों से बड़ा है। कहा गया है कि इसके जरिए भारत संदेश देना चाहता है कि एआई के क्षेत्र में वह एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग को यथासंभव विनियमित करने के मकसद से ब्रिटेन में 2023… Continue reading इम्पैक्ट एआई समिट का

बांग्लादेश में क्या बदला?

जमात-ए-इस्लामी और अवामी लीग की स्थिति में बुनियादी बदलाव बांग्लादेश में आए असल बदलाव का संकेत है। ये परिवर्तन सिरे से नकारात्मक है। इससे आवाम का कोई भला नहीं होगा। बल्कि उन्हें धर्मांधता की खाई में झोंकने की प्रवृत्तियां और हावी होंगी। बांग्लादेश में अगस्त 2024 से अब तक के घटनाक्रम के अध्ययनकर्ता इसी नतीजे… Continue reading बांग्लादेश में क्या बदला?

मणिपुर में सांप्रदायिक जहर

राजनेताओं को स्वार्थ से उठ कर समस्या पर विचार करना चाहिए। समाज में सांप्रदायिक भावनाओं के कारण व्यक्तिगत रिश्ते तनाव में आ रहे हों, तब थोपी गई एकता कारगर नहीं हो सकती। जरूरत पहले सामाजिक दुराव खत्म करने की है। पिछले महीने मणिपुर चूराचंदपुर में 31 वर्षीय मयंगलम्बम सिंह का अपहरण कर हत्या कर दी… Continue reading मणिपुर में सांप्रदायिक जहर

राष्ट्रीय सुरक्षा की ठेकेदारी?

यह समझ समस्याग्रस्त है कि सेना में अपनी पूरी कामकाजी जिंदगी गुजारने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा की परवाह नहीं करते अथवा सत्तासीन लोग विपक्षी दलों या नेताओं की तुलना में राष्ट्रीय सुरक्षा के अधिक बड़े पहरुआ हैं। पूर्व सेनाध्यक्ष एम.एम. नरावणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर उठे विवाद के बाद अब खबर… Continue reading राष्ट्रीय सुरक्षा की ठेकेदारी?

सही समय पर विराम

कांग्रेस की मुश्किल यह है कि समर्थन आधार बढ़ाने की कोई कार्ययोजना उसके पास नहीं है। उसके नेता और कार्यकर्ता राजनीति की धूल-धक्कड़ में नहीं उतरना चाहते। वे नफ़ासत से सियासत करते हैं, जिसका परिणाम जनाधार का सिकुड़ते जाना है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करने की संभावना… Continue reading सही समय पर विराम

मुद्दे से ना भटकें

देश के सामने असल सवाल वो ब्योरा है, जो जनरल नरावणे ने लद्दाख क्षेत्र में 2020 में हुई घटनाओं के बारे में दिया है। उन घटनाओं से भारतीय सेना के अंदर कमान शृंखला को लेकर प्रश्न उठे हैं। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरावणे की कथित रूप से अप्रकाशित किताब कैसे छपे रूप में और… Continue reading मुद्दे से ना भटकें

आर्थिक विकास की जटिलताएं

भारत की ताकत फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और आईटी सेवाओं में है, जो उच्च जटिलता वाले क्षेत्रों में आते हैं। लेकिन कृषि और प्राथमिक वस्तुओं की बड़ी हिस्सेदारी आर्थिक जटिलता सूचकांक पर भारत के ऊपर जाने में रुकावट है।  जो देश मैनुफैक्चरिंग की विविधापूर्ण एवं बारीक क्षमताएं विकसित करते हैं, उनका तेजी से विकास होता है। ये… Continue reading आर्थिक विकास की जटिलताएं

सबसे बड़ा रुपैया!

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण भारत के साथ बनी उसकी दुश्मनी क्रिकेट के सौदागरों के लिए रेवेन्यू का बड़ा जरिया बनी हुई है। इसी भावना को नकदी में तब्दील कर बोर्ड, खिलाड़ी, प्रायोजक, ब्रॉडकास्टर, मेजबान आदि सब मालामाल होते हैं। टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मैच नहीं होता, तो अनुमान है कि… Continue reading सबसे बड़ा रुपैया!

बाजार भी छीना

डील के मुताबिक अमेरिका से आयातित कपास से जो वस्त्र बांग्लादेश में बनेगा, उस पर अमेरिका में शून्य आयात शुल्क लगेगा। इस तरह बांग्लादेश के उत्पादक अब भारतीय कपास के बजाय अमेरिकी कपास खरीदने के लिए प्रेरित होंगे। भारत में सरकार समर्थक लोग अभी ये जश्न मना ही रहे हैं कि ट्रेड डील के बाद… Continue reading बाजार भी छीना

जापान में जोरदार जनादेश

प्रधानमंत्री साने ताकाइची इसे पसंद करती हैं कि उनकी तुलना ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर से की जाए। जिस तरह थैचर ने ब्रिटेन की दिशा बदल दी थी, कुछ वैसा ही करने का वादा ताकाइची ने किया है। लंबे समय बाद जापान में किसी नेता को दो तिहाई बहुमत मिला है। सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक… Continue reading जापान में जोरदार जनादेश

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