फिर एक अजीब फैसला

Categorized as संपादकीय

कॉप-33 की मेजबानी से भारत ने इनकार कर दिया है। यह निर्णय रहस्यमय लगता है, क्योंकि मेजबानी पाने की पहल खुद प्रधानमंत्री ने की थी। उसके बाद आखिर ऐसा क्या बदल गया, जिस कारण भारत ने कदम पीछे खींच लिए हैं?

जिस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत के अलग-थलग पड़ने से देशवासियों में व्यग्रता गहराई है, नरेंद्र मोदी सरकार ने फिर एक फैसला लिया है, जिसका भारत की वैश्विक छवि पर खराब पड़ेगा। भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर संबंधित पक्षों के सम्मेलन (कॉप-33) की मेजबानी से इनकार कर दिया है। यह निर्णय रहस्यमय भी लगता है, क्योंकि इसकी मेजबानी पाने की पहल खुद प्रधानमंत्री ने की थी। 2023 में दुबई में हुए कॉप-28 के दौरान उन्होंने ये की पेशकश की, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया था।

मुद्दा है कि उसके बाद आखिर ऐसा क्या बदल गया, जिस कारण भारत ने 2028 में तय सम्मेलन की मेजबानी से कदम पीछे खींच लिए हैं? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बदलाव यह आया कि डॉनल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका जलवायु परिवर्तन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं से अलग हो गया। दरअसल, ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन संबंधी वैज्ञानिकों की सोच को एक धोखा बता रखा है। उन्होंने ‘ड्रिल बेबी ड्रिल’ के नारे के तहत जीवाश्म ऊर्जा का प्रचलन बढ़ाने की मुहिम छेड़ रखी है। क्या वॉशिंगटन में आए इस बदलाव से भारत सरकार प्रभावित हुई है? इससे जुड़ा सवाल यह भी उठेगा कि क्या 2023 में भारत ने मेजबानी इसलिए मांगी थी, क्योंकि क्लाइमेट एजेंडे को आगे बढ़ाना अमेरिका के तत्कालीन जो. बाइडेन प्रशासन की प्राथमिकता थी?

भारत सरकार को ऐसी धारणाओं को तोड़ने का सायास प्रयास करना चाहिए। अभी जबकि ट्रंप की विज्ञान विरोधी अभियानों से दुनिया भर में अमेरिका के सॉफ्ट पॉवर में तेजी से ह्रास हो रहा है, ये सही वक्त है जब भारत जैसा देश ऐसे प्रयासों में अधिक दिलचस्पी लेकर अपनी वैश्विक छवि एवं हैसियत को ऊंचा उठाए। मोदी के बारे में धारणा है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मौजूदगी के लिए उत्साहित रहते हैं। फिर भी इस मामले में भारत सरकार ने विपरीत कदम उठाया है। स्पष्टतः ऐसा कर वह वैश्विक चिंताओं की आवाज बनने का मौका गवां रही है। साथ ही ऐसे कदमों से ऐसी धारणाओं को भी बल मिल रहा है कि भारत अमेरिका का पिछलग्गू बनता जा रहा है।


Previous News Next News

More News

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

July 30, 2026

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद…

logo