सड़कों पर छलका असंतोष

Categorized as संपादकीय

नोएडा में कारखाना मजदूर सड़क पर उतरे। वहां की घटनाओं ने उन हालात की ओर ध्यान खींचा, जिससे हाल में देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूर आंदोलित हुए हैँ। मजदूरों के असंतोष पर सहानुभूति से ध्यान दिया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में मजदूरों का उबलता असंतोष सोमवार को सड़कों पर छलक गया। हिंसा, आगजनी और पुलिस कार्रवाई ने वहां उन हालात की ओर ध्यान खींचा, जिस कारण हाल में देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूर आंदोलित हुए हैँ। वैसे, तो इन आंदोलनों के स्थल देश भर में फैले हुए हैं, लेकिन खास चर्चा हरियाणा में हुई आंदोलनकारी गतिविधियों की हुई। आखिरकार उनका असर हुआ, और हरियाणा सरकार ने आठ अप्रैल को सभी श्रेणियों के कर्मियों की न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी का एलान किया। इस निर्णय का असर नोएडा में देखा गया।

कुछ ही दूरी पर एक जैसे काम के लिए अलग-अलग मजदूरी की बात उन्हें चुभी और वे भी आंदोलन पर उतर आए। वैसे भी एक विश्लेषण के मुताबिक 2016 से अब तक दिल्ली और हरियाणा की तुलना में उत्तर प्रदेश न्यूनतम मजदूरी काफी कम बढ़ी है। दिल्ली में ये वृद्धि लगभग 90 फीसदी और हरियाणा में 89 प्रतिशत रही, जबकि उत्तर प्रदेश में इसमें महज 42.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। यानी गुजरे एक दशक में हुई मुद्रास्फीति के अनुपात में यूपी में मजदूरी नहीं बढ़ी है। ऐसे में मजदूरों के असंतोष को समझा जा सकता है। इस बीच श्रम कानूनों की जगह श्रम संहिताएं लागू होने और आठ घंटे काम की सीमा हटाए जाने की वजह से मजदूर पहले मिली वैधानिक सुरक्षाओं से वंचित हो गए हैं।

उनकी पीड़ा को एक मजदूर की एक टीवी चैनल पर कही गई इस बात से समझा जा सकता है कि रोजाना 12 घंटे काम करने के बाद उन्हें महीने में 13 हजार रुपये मिलते हैं! अब उत्तर प्रदेश सरकार ने कारखाना मालिकों और मजदूरों के बीच संवाद कायम करने के लिए एक समिति बनाई है। मगर साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे नक्सलवाद को पुनर्जीवित करने की साजिश का शक भी जता दिया है। ऐसे में यह नहीं लगता कि मजदूर सरकार से किसी हमदर्दी की आशा कर सकते हैं। मगर ऐसे नजरियों से उस वक्त औद्योगिक शांति कायम करना कठिन होगा, जब श्रमिक वर्ग पर बढ़ते आर्थिक संकट की गहरी मार पड़ी है।


Previous News Next News

More News

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

July 30, 2026

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद…

logo