आदेश दुरुस्त करें

Categorized as संपादकीय

ये नहीं कहा जा सकता कि आवश्यक दवाओं के मामले में कंपनियों से कोई नाइसांफी होती है। फिर भी दवा कंपनियों ने 2013 से ही मूल्य नियंत्रण आदेश के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रखी है। अब उन्हें एक न्यायिक सफलता मिली है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के एक निर्णय के परिणामस्वरूप बहुत-सी जरूरी दवाएं मूल्य नियंत्रण की श्रेणी से बाहर हो जाएंगी। कोर्ट ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश- 2013 की भाषा में मौजूद खामियों का लाभ दवा कंपनियों को दिया है। उसने कहा कि मूल्य संबंधी विनियमों को उन दवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता, जिनका स्पष्ट रूप से उपरोक्त आदेश में उल्लेख नहीं है। सरकार इसी आदेश के तहत आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) बनाती है, जिनकी मनमाने ढंग से कीमत नहीं बढ़ाई जा सकती। विशेषज्ञों के मुताबिक इस व्यवस्था को नाकाम करने के लिए कंपनियां मूल दवा में मामूली हेरफेर कर उसके नए संस्करण बनाती रही हैं।

ये दवाएं अलग नाम से बाजार में उतारी जाती हैं। अब तक 2013 के आदेश की भावना के अनुरूप सरकार ऐसी दवाओं को एनएलईएम में शामिल करती आई है। फिलहाल, इस सूची में 348 दवाएं हैं, जिनके सभी संस्करण (खूराक मात्रा और पॉवर के रूप में) उस सूची में शामिल हैं। अब ये सूरत बदल सकती है। हालांकि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में जाने का विकल्प है, लेकिन आशंका है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्टे नहीं दिया, तो बीच की अवधि में बहुत-सी दवाएं आम उपभोक्ता की पहुंच से बाहर हो जाएंगी।

इसलिए जरूरी है कि सरकार भाषा की खामियों को दुरुस्त करते हुए 2013 के आदेश को नए सिरे जारी करे। यहां उल्लेखनीय है कि कंपनियों को एनएलईएम के तहत आने वाली दवाओं की कीमत साल में एक बार बढ़ाने का अधिकार 2013 के आदेश के तहत मिला हुआ है। गुजरे वर्ष के थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर वे इनके दाम बढ़ाती रही हैं। अंतर सिर्फ यह है कि ऐसी वृद्धि का तर्क उन्हें पेश करना पड़ता है, जिस पर सरकार की नज़र रहती है। अतः ये नहीं कहा जा सकता कि इन दवाओं के मामले में कंपनियों से कोई नाइसांफी होती है। लेकिन दवा कंपनियों ने 2013 से ही उपरोक्त आदेश के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रखी है। अब उन्हें एक न्यायिक सफलता मिली है। मगर सरकार को यह याद रखना चाहिए कि आम मरीजों के हक की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है।


Previous News Next News

More News

तीन आदिवासी बालिकाओं की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण, कठोर कार्रवाई हो: दिग्विजय सिंह

June 3, 2026

राज्यसभा सांसद एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के अंतर्गत आदिवासी बहुल ग्राम सगौर में कुएं में डूबने से तीन नाबालिग आदिवासी बालिकाओं की हुई दर्दनाक मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही एवं पेयजल व्यवस्था की विफलता का गंभीर उदाहरण बताते…

कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री बने डीके शिवकुमार, भव्य समारोह में ली शपथ

June 3, 2026

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने बुधवार को राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। बेंगलुरु स्थित लोक भवन परिसर के ग्लास हाउस में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल थावरचंद्र गहलोत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समर्थकों के नारों के बीच डी.के. शिवकुमार मंच पर पहुंचे और सबसे पहले…

परिसीमन बिल आएगा तो अब क्या होगा?

June 3, 2026

केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी कर रही है। पिछली बार भी इसे परिसीमन के नाम पर नहीं लाया गया था। तब भी महिला आरक्षण के लिए बने नारी शक्ति वंदन कानून के साथ इसे जोड़ा गया था। संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद सरकार ने सत्रावसान नहीं करके…

विपक्ष की कमान कांग्रेस के हाथ में

June 3, 2026

विपक्षी पार्टियों को इसका अंदाजा है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल लाना चाहती है। संविधान के 131वें संशोधन बिल के जरिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करना चाहती है और सीटें बढ़ा कर 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना चाहती है। विपक्ष ने पिछली बार इसे रोक दिया था।…

हिमाचल में कांग्रेस के सामने बड़ी समस्या

June 3, 2026

सब जगह सत्तारूढ़ पार्टियां स्थानीय निकायों के चुनाव जीत रही हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है। इससे पहले गुजरात में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था। तेलंगाना में ऐसे ही कांग्रेस ने बहुत बड़ी जीत हासिल की थी। एक केरल अपवाद था, जहां सत्तारूढ़ वाम मोर्चा को कांग्रेस ने…

logo