जिन धर्मों में वर्ण व्यवस्था का प्रावधान नहीं है, उन्हें अपनाने के बाद यह अपेक्षा स्वाभाविक रूप से रहती है कि संबंधित व्यक्ति जातिगत पहचान से मुक्त हो जाए और इस आधार पर उससे भेदभाव की गुंजाइश ना रहे। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस निर्णय पर मुहर लगा दी है कि… Continue reading अपेक्षा के अनुरूप निर्णय
