अपना सोना, अपने पास

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आरबीआई का अभी जो 698.5 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, उसमें 17 फीसदी हिस्सा सोने का है। अप्रैल 2023 की शुरुआत में यह हिस्सा महज 7.8 प्रतिशत का था। तब से हर साल इसमें बढ़ोतरी हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले अक्टूबर से मार्च के बीच विदेशी भंडारों से अपना 100 टन सोना वापस मंगवा लिया। इस तरह अब उसके भंडार में 680 टन सोना हो गया है। दरअसल, आरबीआई का अभी जो 698.5 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, उसमें 17 फीसदी हिस्सा सोने का है। अप्रैल 2023 की शुरुआत में यह हिस्सा महज 7.8 प्रतिशत का था। तब से हर साल इसमें बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह सोने की खरीदारी के साथ-साथ विदेशों से अपना सोना मंगवाना भी है। आरबीआई का यह कदम दुनिया में 2022 के बाद तेज होती गई प्रवृत्ति के अनुरूप है।

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों ने अपने यहां जमा रूस के सोने को जब्त कर लिया। उससे उनकी वित्तीय व्यवस्था की साख पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए। संदेश गया कि जो देश अपनी विदेश या सामरिक नीति को अमेरिका के अनुरूप नहीं रखेगा, उसकी भी संपत्ति जब्त हो सकती है। अब हालात ऐसे हैं कि फ्रांस अमेरिका में रखे अपने सोने को वापस मंगवा चुका है। जर्मनी भी ऐसा करने का संकेत दे रहा है। इस बीच सोने की खरीदारी का आलम यह है कि गुजरे छह में से पांच महीनों अमेरिका का सबसे बड़ा निर्यात सोना रहा।

समझा जाता है कि इसका अधिकांश हिस्सा स्विट्जरलैंड गया, जहां से चीन और अन्य देशों ने उसकी बड़े पैमाने पर खरीदारी की। चीन ने अपनी मुद्रा को स्वर्ण समर्थित करने की दिशा में स्पष्ट कदम उठाए हैँ। इन परिघटनों के कारण सोने की कीमत तेजी से बढ़ी है। उसका लाभ सेंट्रल बैंकों को मिला है। कीमत बढ़ने के साथ उनके भंडार मौजूद सोने का मूल्य बढ़ता है, जिससे बिना किसी नई आवक के विदेशी मुद्रा भंडार बड़ा दिखने लगता है। साथ ही डॉलर की कीमत में अस्थिरता के प्रभाव से बचाव भी होता है। अच्छी बात है कि आरबीआई इस मामले में वैश्विक रुझान के अनुरूप चला है। उसने सोने में अपना निवेश भी बढ़ाया है। जब दुनिया बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हो, ऐसे कदम सुरक्षा का भाव मजबूत करते हैं।


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