समाजवादी पार्टी ने चुनाव रणनीति बनाने औऱ चुनाव प्रबंधन करने वाली एजेंसी आईपैक के साथ करार खत्म कर लिया है। कुछ समय पहले ही खबर आई थी कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने आईपैक से करार किया है। ध्यान रहे आईपैक के संस्थापक प्रशांत किशोर हैं, जिन्होंने 2012 का गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ने में भाजपा और नरेंद्र मोदी की मदद की थी और फिर 2014 में लोकसभा चुनाव में रणनीति बनाने और प्रबंधन का काम किया था। उसके बाद उनके पूरे देश ने जाना। उन्होंने कई राज्यों में नेताओं के लिए काम किया। ममता बनर्जी को पिछला चुनाव उन्होंने लड़वाया था। लेकिन अब प्रशांत किशोर आईपैक से अलग हो गए हैं और अपनी राजनीति कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर के हटने के बाद प्रतीक जैन, विनेश चंदेल, ऋषिराज सिंह आदि आईपैक का संचालन करते हैं। यह टीम पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का चुनाव संभाल रही थी। कहा जा रहा है कि बंगाल में ममता की हार के बाद अखिलेश यादव ने आईपैक से करार तोड़ लिया है। लेकिन इसका असर कारण पश्चिम बंगाल का फैसला नहीं है, बल्कि एजेंसी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई है। असल में चुनाव से पहले जनवरी में ईडी ने आईपैक पर छापा मारा। ईडी ने कहा कि कोयला तस्करी का पैसा आईपैक के जरिए काले से सफेद किया गया है। उस समय इसे लेकर बड़ा हंगामा हुआ। बाद में ईडी ने चुनाव प्रचार के बीच छापा मारा और एक निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने इसके बाद ऋषिराज सिंह को भी पूछताछ के लिए बुलाया। ईडी के चक्कर में आईपैक ने काम ही बंद कर दिया। बीच चुनाव में ममता बनर्जी की रणनीति का काम बंद हो गया। अखिलेश यादव ने इसी डर से आईपैक को छोड़ा। उनको लगा कि अगर चुनाव के बीच ईडी कार्रवाई करे, कंपनी के निदेशकों को गिरफ्तार करे और उनका कार्यालय बंद हो तब चुनाव पूरी तरह से पटरी से उतर जाएगा। उन्होंने आईपैक के ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से नहीं, बल्कि ईडी की चिंता में आईपैक का साथ छोड़ा है।
