उबलता हुआ हिंदी विरोध

Categorized as संपादकीय

विभागीय हिंदी परीक्षा कोई नई योजना नहीं है। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के गठन से पहले हुई थी। 1960 में महाराष्ट्र बनने के बाद भी इसे जारी रखा गया। लेकिन अब आकर इस पर विवाद खड़ा हुआ है।

महाराष्ट्र में हिंदी विरोधी सियासत बेलगाम हो गई है। इस महीने से मराठी ना लिख-बोल सकने वाले टैक्सी/ ऑटो ड्राइवरों पर रोक लगाने के बाद अब वहां सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी की विभागीय परीक्षा को स्थगित करना पड़ा है। इसके पहले त्रिभाषा फॉर्मूले के तहत हिंदी पढ़ाने की योजना दफ़न कर दी गई थी। सार्वजनिक जगहों पर मराठी ना बोलने वाले लोगों के साथ झड़प और हिंसा की घटनाएं भी हाल में हुई हैं। राज्य के गजटेड और नॉन-गजटेड कर्मचारियों के लिए हिंदी ज्ञान की विभागीय परीक्षा 28 जून को तय थी। इस तारीख का एलान होते ही महाराष्ट्र नव- निर्माण सेना और कई अन्य मराठी भाषी समूहों ने इसके खिलाफ मुहिम छेड़ दी। कहा कि जब मराठी सरकारी कामकाज की भाषा है, तो कर्मचारियों का हिंदी ज्ञान जांचने की क्या जरूरत है? माहौल को गरमाता देख देवेंद्र फड़णवीस सरकार ने इम्तहान स्थगित करने और इस परीक्षा की जरूरत की समीक्षा करने की घोषणा की। कहा- ‘अगर पाया गया कि ऐसे इत्महान की जरूरत नहीं है, तो आगे इसका आयोजन नहीं किया जाएगा।’ गौरतलब है कि विभागीय हिंदी परीक्षा कोई नई योजना नहीं है।

इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के गठन से पहले हुई थी। 1960 में महाराष्ट्र बनने के बाद भी इसे जारी रखा गया। लेकिन अब आकर यह विवाद का मुद्दा बना है। यह राज्य में तेजी से बदले माहौल की मिसाल है। उस राज्य में हिंदी विरोध का ऐसा माहौल बनना हैरतअंगेज है, जहां की मातृभाषा मराठी की लिपि वही देवनागरी है, जिसमें हिंदी लिखी जाती है और जिस राज्य की राजधानी बॉलीवुड का गढ़ है, जहां बनने वाली फिल्मों का हिंदी के प्रसार में संभवतः महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह भी कम अचरज की बात नहीं कि ऐसा उस भाजपा के शासनकाल में हुआ है, जिसकी केंद्र सरकार के हिंदी के प्रति (अति) उत्साह के कारण कुछ राज्यों में भाषाई विवाद खड़े हुए हैं। मगर महाराष्ट्र में भाजपा ने हिंदी विरोधियों के आगे घुटने टेक रखे हैं। तो सवाल उठता है कि क्या हिंदी को लेकर पार्टी की कोई सोच है, या यह उसके लिए महज एक भावनात्मक राजनीतिक मुद्दा है?


Previous News Next News

More News

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

July 30, 2026

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद…

logo