फिर वही रोना है

पश्चिमी अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि चीन ने “गैर-बाजार” नीतियों पर चलते हुए फ्री मार्केट अर्थव्यवस्थाओं को अपने सस्ते उत्पादों से पाट दिया है। इस कारण वहां के उद्योग-धंधों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां बनी हैं। मगर हल क्या है? साल 2025 में चीन से व्यापार में भारत का घाटा रिकॉर्ड 116.12 बिलियन डॉलर तक पहुंच… Continue reading फिर वही रोना है

सच को स्वीकार कीजिए

2026 में भारत वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी करने वाला है। भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भी दावेदार है। इस बीच विदेशी खिलाड़ियों की शिकायतों से भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्रबंधन क्षमता को लेकर खराब छवि बन सकती है। भारत की मेजबानी व्यवस्था पर डेनमार्क के खिलाड़ियों के गंभीर सवाल उठाने से इंडिया ओपन… Continue reading सच को स्वीकार कीजिए

स्वागत-योग्य हस्तक्षेप

जब गिग वर्क का चलन तेजी से बढ़ रहा हो, इस काम में लगे श्रमिकों के लिए कामकाज की अपेक्षाकृत अधिक मानवीय परिस्थितियां सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। गिग वर्कर यूनियनों की बाकी मांगों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। ऐप के जरिए वस्तुओं की दस मिनट के अंदर डिलीवरी के चलन को… Continue reading स्वागत-योग्य हस्तक्षेप

आत्म-निरीक्षण की जरूरत

जिन देशों में पहले भारतीय छात्रों को प्रतिभाशाली एवं शिष्ट समझा जाता था, वहां उनके प्रति नजरिया क्यों बदल गया है? भारतीय छात्र जाकर वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं। फिर भी उनकी एंट्री क्यों कठिन होती गई है। विदेश जाकर पढ़ने की हसरत रखने वाले भारतीय छात्रों को एक और झटका लगा है।… Continue reading आत्म-निरीक्षण की जरूरत

भारत को गहरा झटका

पीएसएलवी के जरिए भारत ने उपग्रहों को धरती की कक्षा में स्थापित करने के कारोबार में अग्रणी देश बनने की महत्त्वाकांक्षा पाली है। मगर लगातार दो नाकामियों के बाद इस परियोजना को लेकर विश्वास का संकट पैदा हो गया है। पीएसएलवी रॉकेट की 62वीं उड़ान की नाकामी से भारत की उपग्रह संबंधी महत्त्वाकांक्षा को गहरा… Continue reading भारत को गहरा झटका

अब सांत्वना पुरस्कार!

पैक्स सिलिका का मकसद सेमीकंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाना है। ऐसी सप्लाई शृंखला, जो चीन पर निर्भर ना रहे। मगर यह दीर्घकालीन योजना है, जिसको लेकर अभी कई अस्पष्टताएं हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली पहुंचने पर भारत को जो ‘उपहार’ दिया, वह एक सांत्वना… Continue reading अब सांत्वना पुरस्कार!

रुख में चाहिए स्पष्टता

सरकार ने विपक्ष से संवाद करते हुए राष्ट्र को भरोसे में लिया होता, तो संभवतः चीनी कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खोलने के मुद्दे पर उसे आलोचना नहीं झेलनी पड़ती। बहरहाल, सरकार चाहे तो अब भी यह रास्ता अपना सकती है। हालांकि पुष्टि नहीं हुई है, मगर मीडिया में छपी कई ऐसी रिपोर्टों से… Continue reading रुख में चाहिए स्पष्टता

राजनीति से प्रेरित मांग

अभी भारत के श्रीलंका में हस्तक्षेप करने की जरूरत सिर्फ स्टालिन को महसूस हो सकती है, जिनकी चुनावी रणनीति में तमिल भावनाओं का उभारना महत्त्वपूर्ण पहलू हो सकता है। मगर ऐसा करना भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से श्रीलंका में नया संविधान तैयार करने… Continue reading राजनीति से प्रेरित मांग

सड़क से अदालत तक

कोलकाता की घटना संघीय ढांचे के चरमराने का संकेत है। संबंधित पक्ष ऐसे विवादों से सड़कों पर निपटने लगें, तो उसका अर्थ है कि बात संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में नहीं रह गई है। आखिर इस तरह की नौबत क्यों आई? कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय के छापे का मुकाबला मुख्यमंत्री ममता… Continue reading सड़क से अदालत तक

ट्रंप की विश्व दृष्टि

जब पूछा गया कि क्या उनकी वैश्विक शक्ति की कोई सीमा है, तो डॉनल्ड ट्रंप ने कहा- ‘हां, एक चीज है- मेरी अपनी नैतिकता। मेरा अपना दिमाग। यही एक चीज है, जो मुझे रोक सकता है।’ जो बातें डॉनल्ड ट्रंप पर बतौर इल्जाम कही जाती थीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब खुद उसकी पुष्टि कर दी… Continue reading ट्रंप की विश्व दृष्टि

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