दूर नहीं हुआ संदेह?

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अर्थशास्त्रियों की ये टिप्पणी महत्त्वपूर्ण है कि प्रमुख आर्थिक संकेतकों और जीडीपी के आंकड़ों के बीच संबंध 2015 में टूटा, जब 2011-12 के आधार पर वर्ष पर नई सीरीज अपनाई गई। इसका एक प्रमुख कारण अनुचित डिफ्लेटर अपनाया जाना था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत बड़े देशों के बीच सबसे तेज गति से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था है। मगर निर्यात, ऋण, कर वसूली, बिजली उपभोग, बिक्री, एवं औद्योगिक उत्पादन संकेतक आदि से संबंधित आंकड़े इस रुझान की पुष्टि नहीं करते। अर्थशास्त्रियों के लिए इसे समझना रहस्य बना रहा है। हाल में जीडीपी के अपनाए गए नए आधार वर्ष और नई विधि के बावजूद यह रहस्य सुलझा नहीं है। अमेरिका स्थित पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमिक्स (पीआईआईई) के एक ताजा शोध पत्र में इस रहस्य को समझने की कोशिश की गई है।

भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार एवं अब पीआईआईई से जुड़े अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रह्मण्यम और दो अन्य अर्थशास्त्री इस शोध में शामिल हुए। वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जीडीपी की नई सीरीज अपनाए जाने के बावजूद वे समस्याएं दूर नहीं हुई हैं, जिस कारण पुरानी सीरीज से अयथार्थ तस्वीर उभरती थी। इन अर्थशास्त्रियों की ये टिप्पणी महत्त्वपूर्ण है कि प्रमुख आर्थिक संकेतकों और जीडीपी के आंकड़ों के बीच संबंध जनवरी 2015 में टूटा, जब 2011-12 के आधार पर वर्ष पर नई सीरीज अपनाई गई थी। इसका एक प्रमुख कारण अनुचित डिफ्लेटर अपनाया जाना था। तब थोक मूल्य सूचकांक का सेवा क्षेत्र में भी डिफ्लेटर के रूप मे इस्तेमाल किया जाने लगा। इन अर्थशास्त्रियों का दावा है कि डब्लूपीआई सेवा क्षेत्र के मूल्यों को समाहित कर पाने में विफल रहता है।

इन बिंदु पर इस बार भी सुधार हुआ नहीं दिखता। एक अन्य समस्या औपचारिक क्षेत्र के आधार पर अनौपचारिक क्षेत्र के प्रदर्शन का आकलन है। अनौपचारिक क्षेत्र नोटबंदी, जीएसटी और कोविड लॉकडाउन से अधिक बुरी तरह प्रभावित हुआ, लेकिन वो हकीकत जीडीपी आंकड़ों में नहीं झलकी। पिछले दो दशक के आंकड़ों की गणना के आधार पर शोध पत्र में कहा गया है कि विसंगतियों के कारण संभवतः 2005 से 2011 तक असल जीडीपी का एक से डेढ़ प्रतिशत कम अंदाजा लगा, जबकि 2012 से 2023 तक इसे डेढ़ से दो प्रतिशत बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया। अपेक्षा थी कि नई सीरीज से इसमें सुधार होगा। मगर पीआईआईई के शोध-पत्र ने इस संबंध में नए संदेह खड़े कर दिए हैं।


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