काबिल-ए-तारीफ दृढ़ता

अमेरिका में जजों के बहुमत ने महसूस किया कि कोई संवैधानिक व्यवस्था उस स्थिति में स्थिर ढंग से नहीं चल सकती, अगर गणराज्य की मूलभूत इकाई- नागरिक- की परिभाषा मनमाने ढंग से तय की जाती हो। जिस समय भारत में नागरिकता के प्रमाण-पत्र को लेकर जानबूझकर अनिश्चय पैदा कर दिया गया है, अमेरिका के सुप्रीम… Continue reading काबिल-ए-तारीफ दृढ़ता

हमारी भूमिका दर्शक की!

नई दुनिया को परिभाषित करने वाली तकनीकों में अपना प्रतिमान बनाने की होड़ में भारत बहुत पीछे छूट गया है। नतीजतन अमेरिकी या चीनी प्रतिमानों में से किसी एक पर निर्भर होना हमारी नियति बन गई है। खबर है कि फेबल-5 और माइथोस-5 जैसे उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मॉडल्स तक विदेशियों की पहुंच रोकने के डॉनल्ड… Continue reading हमारी भूमिका दर्शक की!

जड़ तक लगा घुन

नीट-यूजी, जेईई, सीयूईटी आदि जैसी परीक्षाओं का मौजूदा ढांचा कोई संयोगवश सामने नहीं आया है। यह नीतिगत प्राथमिकताओं का परिणाम है। पूर्व चेतावनियों के बावजूद केंद्र ने इन्हें विभिन्न स्तरों पर लागू किया है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की अनवरत घटनाओं से भड़के युवा असंतोष के बीच शिक्षा मंत्रालय की नौ सदस्यीय कमेटी… Continue reading जड़ तक लगा घुन

पंथ-निरपेक्षता से समझौता

विधानसभा से पारित किसी कानून पर स्पष्टीकरण देने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि धार्मिक मंच पर हाजिर होने लगे, तो उसे राजसत्ता के प्राधिकार के समर्पण के रूप ही देखा जाएगा। इससे विधायिका की गरिमा लांछित होती है। पंजाब में आम आदमी पार्टी (‘आप’) सरकार का यह रुख कि “अकाल तख्त सर्वोच्च है और उसके फैसलों… Continue reading पंथ-निरपेक्षता से समझौता

फिर युद्ध का साया

ईरानी समाचार एजेंसी फारस की इस टिप्पणी ने सनसनी फैला दी है कि अब ईरान के पास परमाणु बम बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह राय ईरान के अपनी ताकत के नए आकलन को जाहिर करती है। अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे के ठिकानों पर हमला करने के साथ 14 सूत्री सहमति-पत्र (एमओयू)… Continue reading फिर युद्ध का साया

श्रद्धालुओं से विश्वासघात

मंदिर का प्रशासनिक तंत्र पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण के मोर्चे पर बुरी तरह विफल रहा। कड़ी सुरक्षा के बावजूद इस तरह के कृत्य का होना आपराधिक मिलीभगत या कम-से-कम आपराधिक लापरवाही का संकेत है। मुकदमा दर्ज होने और आठ लोगों की गिरफ्तारी के साथ इसकी पुष्टि हो गई है कि अयोध्या के राम मंदिर में… Continue reading श्रद्धालुओं से विश्वासघात

बिन पानी सब सून!

डेटा सेंटर उन क्षेत्रों में बन रहे हैं, जो पानी की किल्लत से ग्रस्त हैं। भारत डेटा सेंटरों में जल उपयोग को लेकर फिलहाल अनिवार्य पर्यावरण मानक या अनिवार्य रिपोर्टिंग के नियम मौजूद नहीं हैं। हर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस डेटा सेंटर की स्थापना की खबर को भारत में एक बड़ी उपलब्धि समझा जाता है। इनसे विदेशी… Continue reading बिन पानी सब सून!

लोकतंत्र पर प्रश्न-चिह्न

बंधुआ मजदूरी उन्मूलन कानून कहां है? या ऐसे कानूनों का कोई मतलब नहीं होता, जिन पर अमल संभव बनाने के लिए जमीनी स्थितियों को बदलने की ठोस योजना पर काम ना हुआ हो? छिहत्तर साल पहले लागू भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत गुलामी जैसी किसी प्रथा को निषिद्ध घोषित किया गया। मगर बंधुआ… Continue reading लोकतंत्र पर प्रश्न-चिह्न

बहुपक्षीयता की बातें कम

ईरान और यूएई के प्रतिनिधियों में हुई झड़प मिसाल है कि बदली विश्व परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स+ के सदस्य ना सिर्फ अलग धरातल पर खड़े हैं, बल्कि वे परस्पर विरोधी रुख भी खुलेआम अपना रहे हैं। ब्रिक्स+ देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की नई दिल्ली में हुई बैठक एक बार फिर इस समूह के अंदर… Continue reading बहुपक्षीयता की बातें कम

पटरी पर है एमओयू

वार्ता में ठोस उपलब्धियां हासिल होना संकेत है कि ट्रंप प्रशासन 39 दिन के युद्ध से बदले शक्ति संतुलन को स्वीकार कर चुका है और अपने बनाए मकड़जाल से निकलने के लिए व्यग्र है। शांति समझौते के लिए सहमति-पत्र (एमओयू) पर दस्तखत के बाद स्विट्जरलैंड में अमेरिका- ईरान की हुई पहली आमने-सामने वार्ता में ठोस… Continue reading पटरी पर है एमओयू

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