ऐसे तो ना बोलिये!

Categorized as संपादकीय

कुछ बेरोजगार फर्जी डिग्रियां हासिल करते हैं, तो फर्जी डिग्री का धंधा चलने देने के लिए जिम्मेदार कौन है? और क्या व्यवस्थाकी कमियों को उजागर करने के लिए आरटीआई कार्यकर्ताओं को अपमान भाव से देखा जाना चाहिए?

कॉकरोच और परजीवी संबंधी अपनी टिप्पणी के बारे में भारत के प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्टीकरण दिया है। कहा कि उन्होंने इन शब्दों का उपयोग सभी युवाओं के लिए नहीं- बल्कि उन लोगों के लिए किया, जो फर्जी डिग्रियां लेकर वकील, मीडियाकर्मी या सोशल मीडियाकर्मी बन जाते हैं। बहरहाल, इस सफाई के बावजूद कुछ सवाल रह जाते हैं। क्या प्रधान न्यायाधीश को इस बात की ठोस सूचना है कि देश में फर्जी डिग्री का धंधा चल रहा है? अगर ऐसे लोग उस संस्था में भी हैं, जिसके अभिभावक जस्टिस सूर्य कांत हैं, तो इस बुराई से मुक्त होने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कदम उठाए हैं?

न्यायमूर्ति कांत ने यह टिप्पणी सीनियर लॉयर का दर्जा हासिल करने की कोशिश में लगे एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते समय की। अगर चीफ जस्टिस इस तथ्य से आश्वस्त हैं कि उस वकील की डिग्री फर्जी है, तो क्या उसे सिर्फ परजीवी और कोकरोच कहकर जाने देना सही कार्रवाई समझी जाएगी?  स्पष्टीकरण के बाद जस्टिस सूर्य कांत की टिप्पणी इस रूप में हमारे सामने रह जाती हैः कुछ बेरोजगार युवा फर्जी डिग्रियां लेकर सम्मानित पेशों में घुस आते हैं या फिर वे आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और व्यवस्था पर हमले करने लगते हैं।

किसी भी संदर्भ और किसी के भी खिलाफ सर्वोच्च अदालतों में ऐसे शब्द बोले जाएं, तो यह गहरे अफसोस की बात होगी। देश में करोड़ों बेरोजगारों का होना भारतीय राज्य की नाकामी है। अगर कुछ बेरोजगार फर्जी डिग्रियां हासिल करते हैं, तो सवाल है कि फर्जी डिग्री के धंधे को चलने देने के लिए जिम्मेदार कौन है? और फिर आरटीआई एक्टिविस्ट ‘व्यवस्था’ की कमियों को उजागर करने में जुट जाते हैं, तो इसके लिए क्या उन्हें अपमान भाव से देखा जाना चाहिए? क्या आरटीआई कानून हर भारतीय नागरिक को “आरटीआई एक्टिविस्ट” बनने का अधिकार नहीं देता? भारतीय न्याय व्यवस्था दोष साबित होने तक सबके निर्दोष होने के सिद्धांत पर आधारित है। इल्जाम बिना साबित हुए किसी के लिए अपमानजनक शब्द बोलना क्या संविधान की भावना के अनुरूप है? इन सभी प्रश्नों पर माननीय प्रधान न्यायाधीश को अवश्य विचार करना चाहिए।


Previous News Next News

More News

प्रदर्शनकारियों को डराने का अभियान

July 31, 2026

छात्रों और युवाओं के आंदोलन से घबरा कर केंद्र सरकार ने उनकी मांगें तो मान लीं लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि उन मांगों को पूरी तरह से स्वीकार करने का सरकार का इरादा है। अब कई तरह के अगर मगर किए जा रहे हैं और दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता व…

अब नहीं हो पाएगा छात्रों का प्रदर्शन

July 31, 2026

बुधवार की शाम को छात्रों के कई समूह जंतर मंतर पर पहुंचे थे। करीब दो घंटे तक उन्होंने प्रदर्शन किया। लेकिन उसमें बहुत उत्साह नहीं दिखा। छात्रों के ये समूह वामपंथी पार्टियों से जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को भी वामपंथी पार्टियों ने समर्थन दिया था। आईसा, एआईएसएफ और…

थरूर, तिवारी आदि शिक्षा पर बहस से बाहर रहे

July 31, 2026

कांग्रेस पार्टी के नेता भाजपा के अनुशासन और एक नेता के प्रति सबके समर्पण को लेकर भाजपा और संघ का मजाक उड़ाते हैं। लेकिन असल में कांग्रेस में भी सब कुछ वैसा ही है, जैसा भाजपा में है। कांग्रेस में भी आलाकमान के खिलाफ बोलने या उससे अलग राय रखने वालों के लिए कोई जगह…

दिल्ली में सिर्फ 17 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ

July 31, 2026

दिल्ली की आबादी दो करोड़ के करीब है और डेढ़ करोड़ मतदाता हैं। अगर सिर्फ मतदाताओं की संख्या के लिहाज से देखें तो 70 लाख के आसपास वयस्क महिलाएं हैं, जो मतदाता हैं। लेकिन दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने महिला सम्मान के नाम पर जिस लक्ष्मी योजना की शुरुआत की है उसमें सिर्फ 17…

बंगाल में अलग प्रयोग चल रहा है

July 31, 2026

पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूलों में बच्चों के मिड डे मील में अंडा शामिल करने का ऐलान किया है। इससे लेफ्ट, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेता काफी खुश हैं कि उन्होंने दबाव डाल कर सरकार को मजबूर किया कि वह बच्चों के खाने में अंडा शामिल करे। लेकिन क्या सचमुच सरकार को लगा है…

logo