सवा दो महीनों तक आर्थिक मजबूती का गैर-जरूरी दिखावा करने के बाद आखिरकार अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों” का मुकाबला करने के लिए सात-सूत्री अपील भारतवासियों से की है।
तो आखिर ये नौबत आ पहुंची। प्रधानमंत्री को डॉलर और तेल- गैस बचाने के लिए आम नागरिकों से अपील करनी पड़ी है। सवा दो महीनों तक आर्थिक मजबूती का गैर-जरूरी दिखावा करने (मुमकिन है जारी चुनाव के कारण किया गया हो) के बाद अब नरेंद्र मोदी ने “चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों” का मुकाबला करने के लिए सात-सूत्री अपील भारतवासियों से की है। कहा है कि ऊर्जा बचाने के लिए उन्हें वर्क फ्रॉम होम को तरजीह देनी चाहिए, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर पेट्रोल- डीजल की खपत घटानी चाहिए, और रसोई ईंधन के इस्तेमाल में कटौती करनी चाहिए। विदेशी मुद्रा खर्च ना हो, इसके लिए साल भर उन्हें सोना नहीं खरीदना चाहिए, स्वदेशी उत्पादों का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए, और विदेश यात्रा से बचना चाहिए।
साथ ही रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल घटाने के लिए कुदरती खेती की ओर जाना चाहिए। ये बातें ऊर्जा, डॉलर, और उर्वरकों की संभावित किल्लत की ओर इशारा करती हैं। ईरान युद्ध ने विश्व ऊर्जा बाजार के स्वरूप को फिलहाल बदल दिया है। इसकी मार उन तमाम देशों पर पड़ी है, जिनके पास अपना ऊर्जा स्रोत नहीं है और अच्छे दौर में रणनीतिक भंडार बना लेने की बात जिनके दिमाग में नहीं आई। फिलहाल, बाजार में कच्चा तेल उपलब्ध है, लेकिन उसके लिए (फरवरी की तुलना में) सवा से डेढ़ गुनी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव तेजी से बढ़ा है।
इसी बीच विदेशी निवेशकों की भारत से पैसा निकालने के तेज होती गई रफ्तार और रुपये की कीमत में आई भारी गिरावट ने संकट और बढ़ा दिया है। उधर पश्चिम एशिया से घटे आयात के कारण उर्वरक में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स का अभाव हो गया है, जिससे खाद्य संकट की आशंकाएं गहराई हैँ। ऐसे में कई देश पहले ही ऊर्जा एवं डॉलर बचाने के उपाय अपना चुके हैं। मगर भारत में बात तब शुरू हुई है, जब पानी सिर तक पहुंच गया है। तब भी बात सिर्फ नागरिकों तक है। जो भारतीय कंपनियां अरबों डॉलर का अमेरिका में कर रही हैं, उनमें देशभक्ति की भावना जगाने का आह्वान अभी नहीं किया गया है।
