करार के अंदर करार

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क्रिटिकल मिनरल्स के बारे में हुए समझौतों की सफलता ऐसे वित्त की व्यवस्था पर निर्भर है, जो शीघ्र मुनाफे के लिए बेचैन ना हो। साथ ही प्रतिभा एवं कौशल जुटाए जा सके, तो बेशक चीन पर निर्भरता से मुक्ति मिल सकेगी।  

क्वॉड के विदेश मंत्रियों की बैठक का लगभग पूरा ध्यान आधुनिक उद्योगों के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला तैयार करने पर केंद्रित रहा। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति शृंखला बनाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों से 20 बिलियन डॉलर जुटाने का इरादा जताया। इसके अतिरिक्त भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने इसी मकसद से एक अलग करार के फ्रेमवर्क पर दस्तखत किए। इसके तहत क्रिटिकल मिनरल्स के खनन, प्रोसेसिंग, और रिसाइक्लिंग की आपूर्ति शृंखलाएं बनाने के लिए दोनों देश सहयोग करेंगे।

छह महीने पहले ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युग के लिए सुरक्षित एवं विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला’ बनाने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में पैक्स सिलिका नाम की पहल शुरू की गई थी। इसका मकसद भी क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग कायम करना था। इन बातों से साफ है कि खासकर अमेरिका की निगाह में रेयर अर्थ सहित तमाम महत्त्वपूर्ण खनिज आज कितने अहम हैं। खास बात यह है कि इन खनिजों की दुनिया में कोई कमी नहीं है। लेकिन इनकी प्रोसेसिंग और उनसे उपयोग योग्य उत्पाद बनाने की लगभग 90 फीसदी क्षमता सिर्फ चीन के पास है। नतीजतन, चीन तमाम देशों की सामरिक एवं रणनीतिक मंशाओं पर लगाम लगाने में सक्षम बना हुआ है। अतः अमेरिका ने अब अपने नेतृत्व में वैकल्पिक आपूर्ति शृंखला तैयार करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

मगर इन खनिजों से उपयोग लायक उत्पाद बनाना जटिल, महंगी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रिया है। इसकी क्षमता हासिल करने में भी वक्त लगेगा। अमेरिका की वित्तीयकृत अर्थव्यवस्था में ऐसी परियोजनाएं लगाना कठिन हो गया है, जिनके बारे में समझा जाता हो कि उनमें “हाथ गंदे” होते हैं। इसलिए वह करार-दर करार कर रहा है। बहरहाल, ऐसे प्रोजेक्ट्स में मुनाफा होने के पहले लंबा इंतजार भी करना होता है। इसलिए ऐसे तमाम समझौतों की सफलता ऐसे वित्त की व्यवस्था पर निर्भर है, जो शीघ्र मुनाफे के लिए उतावला ना हो। साथ ही प्रतिभा एवं कौशल को तराशने की चुनौती है। ये सब जुटाए जा सके, तो निसंदेह दुनिया चीन पर निर्भरता से मुक्त हो सकेगी।


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