क्या तय होगी जवाबदेही?

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सीबीएसई परीक्षा को लेकर बने अविश्वास के लिए जिम्मेदार कौन है? सरकार ने सिस्टम लागू करने के पहले यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया कि वह दोषमुक्त है? क्या इसकी जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की गड़बड़ियों ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की परीक्षा के रिजल्ट को संदेह के दायरे में ला खड़ा किया है। अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने की अर्जी देने वाले कम-से-कम 12 छात्र इस सिस्टम में गंभीर गड़बड़ियों का इल्जाम लगा चुके हैं। एक छात्र ने तो यहां तक बताया है कि उसे भौतिक-शास्त्र की जो उत्तर पुस्तिका दिखाई गई, हैंडराइटिंग से साफ है कि वह उसकी नहीं थी। कई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन्ड कॉपी साफ नहीं दिखी।

खुद सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक 68 हजार उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा स्कैनिंग करनी पड़ी। मजबूरी में लगभग 13,500 उत्तर पुस्तिकाओं की ऑफलाइन जांच करानी पड़ी। नए सिस्टम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की हार्ड कॉपी की जगह उनकी स्कैन्ड कॉपी की ऑन-स्क्रीन जांच का चलन शुरू किया गया है। सीबीएसई का वादा था कि इससे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच तेजी और पारदर्शी तरीके से होगी। मगर शिक्षक संगठनों ने फरवरी में ही चेता दिया था कि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें नए सिस्टम के उपयोग की अपेक्षित ट्रेनिंग नहीं दी गई है। फिर करोड़ों पन्नों की स्कैनिंग और उनकी ऑन-स्क्रीन जांच के सिस्टम का पर्याप्त परीक्षण भी नहीं हुआ है। लेकिन सीबीएसई अपनी जिद पर अड़ा रहा। जब रिजल्ट आया, तो पिछले साल की तुलना में उतीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या में तीन प्रतिशत की गिरावट आई।

नतीजतन, उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की अर्जियां दाखिल होने लगीं, जिससे गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास और कानपुर के विशेषज्ञों से सिस्टम का परीक्षण कराने का एलान किया है। लेकिन मुद्दा यह है कि इस वर्ष मची अफरातफरी और परीक्षा व्यवस्था को लेकर बने अविश्वास के लिए जिम्मेदार कौन है? सरकार ने सिस्टम लागू करने के पहले यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया कि वह दोषमुक्त है? नीट पेपर लीक प्रकरण में पहले से सवालों से घिरे प्रधान के लिए क्या यह उचित नहीं होगा कि इन गड़बड़ियों की जवाबदेही वे स्वीकार करें? ऐसा नहीं हुआ, तो शिक्षा व्यवस्था को लेकर गहरा रहे अविश्वास को दूर करना और कठिन हो जाएगा।


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