बदल गया शक्ति संतुलन

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दुनिया में लगभग एक तिहाई ऊर्जा एवं अन्य जरूरी चीजों का नौवहन होरमुज और बाब-ए-मंदब जलमार्गों से होता है। यानी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के नौवहन पर ईरान और अंसारुल्लाह ने लगभग निर्णायक प्रभाव जमा लिया है।

यमन में अंसारुल्लाह (हूती) की ताजा कामयाबियों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र के समीकरण में बड़ा बदलाव ला दिया है। सऊदी अरब समर्थित कथित अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार से अंसारुल्लाह बागियों ने यमन के पूरे लाल सागर तट और बाब-अल मंदब जलडमरूमध्य को छीन लिया है। यानी अब यमन के पश्चिमी तटीय इलाकों और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण द्वीपों- मैयून/ पेरिम, हानीश द्वीप समूह, जुकार आदि पर अंसारुल्लाह का नियंत्रण है। अंसारुल्लाह ईरान के सहयोगी हैं। उनके बाब-अल-मंदब तट तक पहुंच जाने का उस क्षेत्र के शक्ति संतुलन पर दूरगामी असर होगा। दुनिया में लगभग एक तिहाई ऊर्जा एवं अन्य जरूरी चीजों का नौवहन होरमुज और बाब-अल-मंदब जलमार्गों से होता है।

होरमुज पर ईरान ने पहले से अपना नियंत्रण कायम कर रखा है। इस तरह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के नौवहन पर ईरान और अंसारुल्लाह ने एक तरह से निर्णायक प्रभाव जमा लिया है। इस बीच अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। इससे सऊदी अरब से कच्चे तेल का निर्यात बेहद बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि इस समय पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमत में फिर से तेज उछाल आया है। यमन लंबे समय से गृह युद्ध का शिकार है। 2011 के बाद से वहां कुछ इलाकों पर अंसारुल्लाह का कब्जा रहा, जबकि कुछ इलाकों पर सऊदी अरब और यूएई समर्थक ताकतें काबिज रहीं। बीते जनवरी में सऊदी फौज ने यूएई समर्थकों को खेदड़ दिया।

अब अंसारुल्लाह ने सऊदी समर्थकों से रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण इलाके छीन लिए हैँ। ये सारा घटनाक्रम पश्चिम एशिया में अमेरिका की कमजोर पड़ी स्थिति का परिणाम है। मार्च 2025 में अंसारुल्लाह को परास्त करने के लिए अमेरिका ने यमन पर बमबारी की, लेकिन बाद उसने युद्धविराम कर लिया। खबरों के मुताबिक अंसारुल्लाह के ताजा हमलों के मद्देनजर सऊदी युवराज मोहम्मद-बिन-सलमान ने डॉनल्ड ट्रंप से दो बार दखल देने की गुजारिश की, जिसकी उन्होंने अनदेखी कर दी। इन घटनाओं का सीधा संदेश है कि पश्चिम एशिया में ईरान और उसके सहयोगियों ने प्रभावशाली पकड़ बना ली है। इस घटनाक्रम के विश्वव्यापी परिणाम होंगे।


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