प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तमिल कवि तिरुवल्लुर की किताब तिरूवक्कुल की प्रति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के नेताओं का स्वागत जिस बैकग्राउंड में किया वह तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर का था। हालांकि कहने को कहा जा सकता है कि हर वैश्विक कार्यक्रम में देश के किसी न किसी हिस्से का बैकग्राउंड बनाया जाता है, जिसके सामने प्रधानमंत्री विश्व नेताओं का स्वागत करते हैं। इसलिए इसमें कुछ ज्यादा राजनीतिक पहलू देखने की जरुरत नहीं है। लेकिन इन दोनों घटनाक्रमों में दक्षिण भारत और खास कर तमिलनाडु की राजनीति से जोड़ कर देखा जाने लगा है।
इसे परिसीमन के मसले पर समर्थन जुटाने के भाजपा के अभियान से भी जोड़ा जा रहा है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार को महिला आरक्षण बिल पास कराने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की जरुरत है और वह बहुमत तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक डीएमके साथ नहीं दे। समाजवादी पार्टी का साथ भाजपा को नहीं मिलेगा क्योंकि वहां पांच महीने में चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले सपा किसी तरह से भाजपा के साथ नहीं दिखना चाहेगी। इसलिए डीएमके पर निर्भरता है। माना जा रहा है कि तमिल गौरव का प्रदर्शन भाजपा की उस जरुरत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री बार बार संगम लिटरेचर और तमिल भाषा की श्रेष्ठता की बात भी करते रहते हैं।
