दो चुनौतियां, एक सबक

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सफल औद्योगिक राष्ट्र वे रहे हैं, जिन्होंने जिस उत्पाद पर ध्यान केंद्रित किया, उसकी पूरी आपूर्ति शृंखला अपने यहां स्थापित की। सफलता का एक सूत्र यह भी है कि उत्पादित वस्तुओं का एक बड़ा घरेलू बाजार भी हो।

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर उद्योग इस समय ‘मेमफ्लेशन’ की चुनौती का सामना कर रहा है। इस शब्द का अर्थ है मेमरी चिप्स की कमी के कारण बढ़ी महंगाई। मेमरी चिप्स की कीमत आसमान पर है, जिससे सेमीकंडक्टर महंगे हो गए हैं। इनका भारी असर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों- खासकर मोबाइल फोन के उत्पादन पर पड़ा है। भारत के लिए ये घटनाक्रम इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि मेक इन इंडिया और चाइना+1 रणनीति की कोई सफलता अपने देश में है, तो वह मोबाइल फोन की मैनुफैक्चरिंग (अथवा असेंबलिंग) है। हालिया वर्षों में भारत से मोबाइल फोन का निर्यात तेजी से बढ़ा है। मगर साथ ही मोबाइल फोन के पाट-पुर्जों का आयात भी बढ़ा है, जो ज्यादातर चीन, दक्षिण कोरिया या ताइवान जैसे देशों से होता है। जो चीजें बाहर से आती हैं, उनमें मेमरी चिप्स भी हैं।

नतीजतन, ताजा ट्रेंड से भारत स्थित कारखानों की मुश्किलें बढ़ी हैँ। एक अन्य खबर है कि अमेरिका में आयात शुल्क संबंधी जारी अनिश्चय के कारण भारत से सोलर मॉड्यूल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस वर्ष की पहली तिमाही में सिर्फ एक को छोड़कर अमेरिका के लिए बाकी सभी भारतीय कंपनियों का निर्यात शून्य रहा। सोलर पैनल्स पर ट्रंप प्रशासन ने 230 फीसदी टैरिफ लगा रखा है, जबकि भारतीय सौर उद्योग का अमेरिका प्रमुख बाजार है। तो सार यह कि जहां मोबाइल फोन उद्योग आयात निर्भरता के कारण पैदा हुई चुनौती झेल रहा है, वहीं सौर ऊर्जा उद्योग निर्यात निर्भरता संबंधी।

तो सबक क्या है? सफल औद्योगिक राष्ट्र वे रहे हैं, जिन्होंने जिस उत्पाद पर ध्यान केंद्रित किया, उसकी पूरी आपूर्ति शृंखला अपने यहां स्थापित की। इसीलिए इंडस्ट्रीयल पार्कों को इतनी अहमियत दी जाती है। साथ ही सफलता का एक सूत्र यह भी है कि उत्पादित वस्तुओं का एक बड़ा घरेलू बाजार हो, जो भू-राजनीतिक एवं व्यापार जनित संकटों के समय संबंधित उद्योग का सहारा बना रहे। भारत में उद्यम के जो सफल क्षेत्र हैं, अब साफ है कि उनमें इन पहलुओं की उपेक्षा की गई। उन्हें अर्थव्यवस्था के समग्र विकास की सोच से इतर स्थापित किया गया। अब उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।


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