ईयू का आपत्तिजनक रुख

Categorized as संपादकीय

यूरोपियन यूनियन और पाकिस्तान के साझा बयान में भारत के नजरिए से कई आपत्तिजनक बातें हैं। यूक्रेन युद्ध के साथ कश्मीर का उल्लेख और कश्मीर को अनसुलझा मुद्दा बताना स्पष्टतः भारत विरोधी रुख है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पिछले हफ्ते हुई चीन यात्रा के समय जारी साझा बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र हुआ। चीन ने जम्मू-कश्मीर को “इतिहास से जन्मा विवाद” कहा। दोनों पक्षों ने इस मुद्दे के “शांतिपूर्ण और उचित समाधान” की बात कही। संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, द्विपक्षीय समझौतों, और संबंधित पक्षों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। स्पष्टतः यह भारत विरोधी बयान था। उचित ही भारत सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई और कश्मीर संबंधी उन टिप्पणियों को सिरे से ठुकरा दिया।

बहरहाल, अब यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने पाकिस्तान के साथ अपने साझा बयान में जो कहा है, वह चीन की टिप्पणियों से भी आगे जाता मालूम पड़ा है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया काल्लास की इस्लामाबाद यात्रा के समय जारी वक्तव्य में कहा गया- ‘पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे की जानकारी दी। ईयू ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने इन टकरावों का संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अनुरूप बातचीत एवं कूटनीति से शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया।’ स्पष्टतः इस कथन में कई आपत्तिजनक बातें हैं। यूक्रेन युद्ध के साथ कश्मीर का उल्लेख और कश्मीर को अनसुलझा मुद्दा बताना सीधे तौर पर भारत विरोधी रुख है। यहां तक कि चीन ने भी भारत- पाकिस्तान के द्विपक्षीय समझौतों का उल्लेख किया था, जबकि ईयू ने उनकी भी अनदेखी कर दी है।

एक अलग टिप्पणी में काल्लास ने पाकिस्तान को “महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति” बताया। पिछले कई दशकों से भारतीय विदेश नीति का एक प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के संरक्षक पाकिस्तान को अलग-थलग करना रहा है। 2008 के मुंबई हमलों के बाद इस दिशा में कई अहम कामयाबियां भी मिली थीं। मगर अब पाकिस्तान को क्यों अहमियत एवं अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता मिल रही है, यह कठिन प्रश्न हमारे सामने है। चीन और 57 सदस्यों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन का हाथ तो हमेशा पाकिस्तान की पीठ पर रहा है, मगर ईयू और अमेरिका के डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने भी उसे अहमियत दें, तो क्या इसे भारतीय विदेश नीति की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाएगा?


Previous News Next News

More News

आप का अलायंस कांग्रेस के लिए खतरा

September 15, 2026

आम आदमी पार्टी की राजनीति का एक हिस्सा अपने चुनाव जीतने का तो है लेकिन साथ ही दूसरा हिस्सा कांग्रेस को कमजोर करते जाने का भी है। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी ने गोवा और गुजरात में कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया था। गुजरात में आप को 13 फीसदी के करीब वोट मिले थे,…

ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे शाह

September 15, 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद…

ब्रिक्स से दक्षिण की राजनीति पर नजर

September 15, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तमिल कवि तिरुवल्लुर की किताब तिरूवक्कुल की प्रति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के नेताओं का स्वागत जिस बैकग्राउंड में किया वह तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर का था। हालांकि कहने को कहा जा सकता है कि हर…

नंदीग्राम में ममता का तीसरा उम्मीदवार

September 15, 2026

ममता बनर्जी विधानसभा की दो सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में किसी सीट से नहीं लड़ रही हैं। पहले माना जा रहा था कि वे चुनाव लड़ सकती हैं। हुमायूं कबीर ने उनको अपनी खाली की हुई सीट से लड़ने का प्रस्ताव दिया था। यह भी कहा जा रहा था कि वे नंदीग्राम से…

संघ परिवार: किस का पैरोकार?

September 15, 2026

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कहा: “यदि कोई हिन्दू सोचे, कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए, तो वह हिन्दू नहीं है। यदि आप अपने को हिन्दू कहना चाहते हैं, तो आप को विश्वास होना चाहिए कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।” पूछना चाहिए: यदि वे इतना अभेद…

logo