समाज तोड़ने वाली बात

किसी राज्य से लिया गया ड्राइविंग लाइसेंस पूरे भारत में मान्य होता है। ऐसे में, भाषा बोलने- पढ़ने की क्षमता के आधार पर किसी राज्य में उसकी मान्यता खत्म करना विवादास्पद एवं आपत्तिजनक सोच है। संभवतः यह अवैध भी है। टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा में निपुण होने की शर्त लागू कर… Continue reading समाज तोड़ने वाली बात

बेमतलब की होड़ है

प्रगति का एकमात्र सार्थक पैमाना लोगों के जीवन स्तर में सुधार है। साफ हवा, पानी, पर्याप्त भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और चिकित्सा मुहैया कराने के लिहाज से अर्थव्यवस्था का आकार महत्त्वपूर्ण है, लेकिन यह निर्णायक पहलू नहीं है। सकल घरेलू उत्पाद के लिहाज से भारत उदय के कथानक को फिर झटका लगा है। चौथे स्थान… Continue reading बेमतलब की होड़ है

आदेश दुरुस्त करें

ये नहीं कहा जा सकता कि आवश्यक दवाओं के मामले में कंपनियों से कोई नाइसांफी होती है। फिर भी दवा कंपनियों ने 2013 से ही मूल्य नियंत्रण आदेश के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रखी है। अब उन्हें एक न्यायिक सफलता मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट के एक निर्णय के परिणामस्वरूप बहुत-सी जरूरी दवाएं मूल्य नियंत्रण की… Continue reading आदेश दुरुस्त करें

ईज ऑफ डाइंग!

वेदांता कंपनी के बिजली संयंत्र में बॉयलर फटने से कम-से-कम 14 मजदूर मारे गए और 30 से ज्यादा कर्मचारी घायल हो गए। अनुमान लगाया जा सकता है कि ये खबर मीडिया में महज एक दिन की सुर्खी बन कर रह जाएगी। भारत सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति किस तरह मजदूरों के लिए ईज… Continue reading ईज ऑफ डाइंग!

सड़कों पर छलका असंतोष

नोएडा में कारखाना मजदूर सड़क पर उतरे। वहां की घटनाओं ने उन हालात की ओर ध्यान खींचा, जिससे हाल में देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूर आंदोलित हुए हैँ। मजदूरों के असंतोष पर सहानुभूति से ध्यान दिया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में मजदूरों का उबलता असंतोष सोमवार को सड़कों पर छलक… Continue reading सड़कों पर छलका असंतोष

जो सवाल मंडराते रहेंगे

पश्चिम बंगाल में ऐसी धारणा बनी है कि एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग का नजरिया मतदाताओं को सूची से बाहर करने के बहाने ढूंढना वाला था। इससे भारत की चुनाव प्रणाली की साख पर टिकाऊ सवाल खड़े हुए हैँ। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष सहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति… Continue reading जो सवाल मंडराते रहेंगे

जो रास्ता चुना गया

भारत में जन कल्याण का जो रास्ता चुना गया है, वह टिकाऊ नहीं है। हर वर्ष पिछले साल की तुलना में औसतन अधिक कर्ज लेने के बावजूद सरकारें नकदी हस्तातंरण की योजनाओं को सुगमता से नहीं चला पा रही हैं। बृहत-मुंबई महानगर पालिका के रिटायर शिक्षक का पेंशन भुगतान ना होने के बचाव में सरकार… Continue reading जो रास्ता चुना गया

अधिकार के मूल में

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भारत में समस्या अधिकारों का अभाव नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारों का सार्थक ढंग से उपभोग किया जा सके। भारत की जमीनी हकीकत से परिचित लोग सहज ही इस राय से इस्तेफ़ाक रखेंगे। अधिकारों पर जारी बहस के बीच प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने यह महत्त्वपूर्ण… Continue reading अधिकार के मूल में

मानव तस्करी के शिकार

विदेश में ऊंची तनख्वाह और चमकदार करियर का झांसा देकर मोटी रकम वसूलने वाले ऐसे अनेक गिरोह सक्रिय हैं, जो बाहर लेकर युवाओं को मुसीबत में छोड़ देते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे अपराध से क्यों आंख मूंदे हुई हैं? सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी उचित है कि कई भारतीयों को नौकरी या पढ़ाई… Continue reading मानव तस्करी के शिकार

इस्लामाबाद में टूटी बात

आठ अप्रैल को हुए 14 दिन के युद्धविराम का क्या होगा? क्या अमेरिका और ईरान अभी इस अवधि तक संयम बरतते हुए गतिरोध तोड़ने की किसी प्रक्रिया में शामिल होंगे या जल्द ही एक दूसरे पर हमले शुरू कर देंगे? अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटों के अंदर शांति वार्ता का टूट… Continue reading इस्लामाबाद में टूटी बात

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