अब दो पायदान नीचे

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इस घटनाक्रम का सबक है कि भारत ने एआई समिट आयोजित करने से ज्यादा ध्यान एआई से संबंधित सामग्रियों के उत्पादन पर लगाया होता, तो आज वह फिसल कर सातवें नबंर पर नहीं पहुंचता।

महीने भर के अंदर बाजार मूल्य (मार्केट कैपिटलाइजेशन) के हिसाब से भारत वैश्विक शेयर बाजार सूची में दो पायदान नीचे उतर गया है। मई में वह ताइवान और इस मंगलवार को दक्षिण कोरिया से नीचे चला गया। 31 दिसंबर 2025 को भारत के शेयर बाजार का कुल मूल्य 5।29 ट्रिलियन डॉलर था, जो दो जून को 4।84 ट्रिलियन डॉलर बचा। स्पष्टतः इस गिरावट का प्रमुख कारण विदेशी निवेशकों का बड़े पैमाने पर भारत से पैसा निकालना है। ईरान युद्ध इसका महज फौरी कारण है।

अमेरिका के टैरिफ लगाने, अमेरिका से अनुकूल शर्तों पर व्यापार समझौता होने की कमजोर पड़ी संभावना, और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अर्थव्यवस्था में भारत की जगह ना बन पाने आदि ने पहले से माहौल नकारात्मक बनाए रखा था। शेयर बाजार अब तक जितना संभला हुआ है, वह दरअसल छोटे देसी निवेशकों के भरोसे है, जो हो रहे घाटे के बावजूद म्युचुअल फंड या अन्य माध्यमों से निवेश करना जारी रखे हुए हैं। वैसे भारत के पिछड़ने की वजह सिर्फ उसके बाजार मूल्य में गिरावट नहीं है। इसी बीच ताइवान और दक्षिण कोरिया के मार्केट कैपिलटलाइजेशन में तेज उछाल आया है। इसकी वजह इन दोनों देशों की चिप और सेमीकंडक्टर जैसी उन हाई टेक वस्तुओं के उत्पादन में महारत है, जिनकी एआई बूम के दौर में तेजी से मांग बढ़ी है।

अतः बीते 31 दिसंबर की तुलना में ताइवान का बाजार मूल्य 3।27 ट्रिलियन से 5।15 ट्रिलियन डॉलर और दक्षिण कोरिया का 2।68 ट्रिलियन से 5।04 ट्रिलियन हो गया है। अमेरिका, चीन, जापान, और हांगकांग के बाद अब ये दोनों देश क्रमशः पांचवें और छठे नंबर पर हैँ। इस घटनाक्रम का सबक है कि भारत ने एआई समिट आयोजित करने से ज्यादा ध्यान एआई से संबंधित सामग्रियों के उत्पादन पर लगाया होता, तो आज वह फिसल कर सातवें नबंर पर नहीं पहुंचता। बहरहाल, ये शेयर बाजार के मूल्य की बातें हैं। आज के दौर में इनका वास्तविक अर्थव्यवस्था एवं बहुसंख्यक जनता के जीवन स्तर से कम ही रिश्ता बचा है। अतः ज्यादा जरूरी अर्थव्यवस्था के उत्पादक पहलुओं पर ध्यान देना है। अगर वहां ताकत बने, तो शेयर बाजार खुद ही फूलते-फलते रहेंगे।


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