तरकस के आखिरी तीर?

Categorized as संपादकीय

कहा जा सकता है कि संकट के समय में जोखिम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं था। मगर संकट क्यों पैदा हुआ? इस प्रश्न का उत्तर नहीं ढूंढा गया, तो फौरी उपायों से मामूली राहत ही मिलेगी।

विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने अपने तरकस में मौजूद कुछ तीर चलाए हैं। बॉन्ड में निवेश पर होने वाले पूंजीगत लाभ को (दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक दोनों) टैक्स फ्री कर दिया गया है। ब्याज से होने वाली आय पर लगने वाले विथहोल्डिंग टैक्स को भी हटा लिया गया है। पूंजी के आवागमन के नियमों को और आसान बनाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकारी उद्यमों के लिए विदेश में कर्ज लेने और भारतीय बैंकों के लिए विदेश में करेंट अकाउंट जमा राशि जुटाने के नियमों को आसान बनाया है। उम्मीद जताई गई है कि इन कदमों से 50-60 बिलियन डॉलर की रकम चालू वित्त वर्ष में भारत आएगी।

इससे भुगतान संतुलन की कमजोर पड़ रही हालत को संभाला जा सकेगा। गौरतलब है, 2025-26 में भुगतान संतुलन में 30.8 बिलियन डॉलर का घाटा दर्ज हुआ। इसका कारण प्रमुख कारण विदेशी और भारतीय निवेशकों का भारत से ले जाकर विदेशों में पैसा लगाना है। इसी बीच कच्चे तेल- गैस और अन्य आयात के महंगाई होने से भी डॉलर का बाहर जाना तेज हुआ है। इससे मंडरा रहे वित्तीय संकट को टालने के लिए अब सरकार ने पूंजी नियंत्रण के बचे-खुचे उपायों को हटा दिया है। साथ ही वे प्रत्यक्ष कर हटा दिए हैं, जो राजकोष में आमदनी का महत्त्वपूर्ण ज़रिया थे। इससे राजकोषीय चुनौतियां बढ़ेंगी।

विनियंत्रित पूंजी दोधारी तलवार की तरह होती है। अच्छे दिनों में इससे पूंजी का आगमन होता है, मगर चुनौतियां बढ़ने पर पूंजी उतनी ही तेजी से उड़न-छू हो जाती है। कहा जा सकता है कि संकट के इस समय में ये जोखिम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं था। फिर भी ये सवाल कायम है कि संकट क्यों पैदा हुआ? देशी और विदेशी पूंजी के लिए भारत में मुनाफे की स्थितियां क्यों प्रतिकूल हुईं? आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में निवेश की होड़ में जुटे निवेशकों को भारत अनाकर्षक क्यों मालूम पड़ने लगा? रुपये की कीमत लगातार क्यों गिरी, जिससे भारत में डॉलर के निवेश में लाभ घटता चला गया है? ये बुनियादी प्रश्न हैं। इनका उत्तर नहीं ढूंढा गया, तो फौरी उपायों से मामूली राहत ही मिलेगी।


Previous News Next News

More News

ट्रंप ने ईरान युद्ध खत्म किया

June 13, 2026

नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त कर दिया है। युद्ध शुरू होने के करीब ढाई महीने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है। इसके साथ ही सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई है कि रविवार…

नेतन्याहू का ईरान पर निशाना

June 13, 2026

नई दिल्ली। ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा ऐलान से हैरान हुए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि वे जब तक इजराइल के प्रधानमंत्री हैं, तब तक ईरान परमाणु बम नहीं बना पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे…

अमेरिकी राजनयिक दूसरी बार तलब

June 13, 2026

नई दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को एक बार फिर अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। होर्मुज की खाड़ी के पास भारतीय नाविकों वाले टैंकर पर अमेरिका की ओर से किए गए हमले का विरोध दर्ज कराने के लिए विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। 24 घंटे में दूसरी बार अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत जेसन…

अब भी द्रोणागिरी पर्वत लाएंगे या नहीं राहुल?

June 13, 2026

सब नसीब की बातें हैं। एक देश है, एक संविधान है, सब के लिए एक नियम-क़ानून हैं, फिर भी अगर भोपाल और रांची में किसी का आसमानी सुल्तानी से सब-कुछ छिन जाता है और किसी को सब-कुछ मिल जाता है तो इसे आप नसीब का खेल नहीं मानेंगे तो और क्या मानेंगे? इसलिए देना है…

नाविकों की मौत पर राहुल ने उठाए सवाल

June 13, 2026

नई दिल्ली। होर्मुज की खाड़ी के पास अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों के मारे जाने की घटना पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को इस मामले पर चुप्पी साधने के लिए उनको कठघरे में खड़ा किया। राहुल ने कहा कि तीन दिनों में…

logo