सिर्फ इरादा काफी नहीं

Categorized as संपादकीय

क्या अपनी खास जरूरतों के मुताबिक एआई का संप्रभु सिस्टम एवं प्रतिमान विकसित करने की दिशा में भारत बढ़ रहा है? जियो का प्रस्तावित संप्रभु एआई बैकबॉनक्या इस कमी को पूरा कर पाएगा?

रिलायंस जियो ने भारत की “संप्रभु आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) रीढ़” निर्मित करने का इरादा जताया है। कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक में प्रबंधक निदेशक मुकेश अंबानी ने जियो के उपभोक्ताओं के लिए जियो कॉल-एजेंट और एआई संचालित माई-जियो ऐप लॉन्च करने की घोषणा भी की। रिलायंस साधन संपन्न कंपनी है। अतीत में उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में लीक से हट कर नई पहल करने और उनमें बड़ी कामयाबियां हासिल करने में वह सफल रही है। इस रिकॉर्ड को देखते हुए लाजिमी है कि उसके हर एलान से लोगों गहरी दिलचस्पी पैदा होती है। कॉल-एजेंट ‘हे जियो’ कहने भर से कॉल ट्रांसक्रिप्शन, सारांश, एक्शन आइटम, रिमाइंडर, मीटिंग नोट्स, राइड बुकिंग, फूड ऑर्डर, टेबल रिज़र्वेशन आदि जैसी सेवाएं देगा।

इसका इस्तेमाल भारत की सभी भाषाओं में किया जा सकेगा। बहरहाल, यह कोई नई राह बनाने वाली बात नहीं है। यह पहल इस समझ के अनुरूप ही है कि भारत एआई यूजर्स के सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर सकता है। असल मुद्दा यह है कि क्या अपनी खास जरूरतों के मुताबिक एआई का संप्रभु सिस्टम एवं प्रतिमान विकसित करने की दिशा में भारत बढ़ रहा है? जियो का प्रस्तावित ‘संप्रभु एआई बैकबॉन’ क्या इस कमी को पूरा कर पाएगा? रिलायंस ने जामनगर में स्थित डेटा सेंटर, कच्छ स्थित क्लीन एनर्जी हब, एनविडिया के जीबी-300 चिप आधारित जीपीयू के उत्पादन आदि की योजना के जरिए इस दिशा में महत्त्वपूर्ण दावा किया है।

लेकिन कंपनी यह दावा तभी पूरा कर सकेगी, अगर वह डेटा सेंटर के साथ-साथ एआई हार्डवेयर उत्पादन का भी स्वदेशी ढांचा खड़ा करे। एनवीडिया के चिप संप्रभु होने की गुंजाइश नहीं देते। उन पर अमेरिकी सरकार का नियंत्रण बना रहता है, जैसाकि चीन के मामले में जाहिर हुआ था। फिर रिलायंस की अमेरिकी कंपनी मेटा के साथ गहरी रणनीतिक साझेदारी है। अब तक रिलायंस हार्डवेयर और सॉफ्टेवेयर के मामले बाहर से आयात और मोटे तौर पर अमेरिकी प्रतिमानों पर निर्भर रही है। देश में तकनीक इन्फ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान परिवेश की कमजोरियां भी इसकी एक बड़ी वजह हैं। क्या अब अपने बड़े इरादे के बूते रिलायंस इनसे उबर पाएगी, यह अहम सवाल है?


Previous News Next News

More News

मानसून सत्र में फिर मुद्दा होगा ऑपरेशन सिंदूर

June 29, 2026

पिछले साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद कोई सत्र ऐसा नहीं बीता है, जिसमें इस सैन्य अभियान, पाकिस्तान और अमेरिका को लेकर संसद में मुद्दा न उठा हो और उस पर विवाद नहीं हुआ हो। अगले महीने संसद का मानसून सत्र होगा और उससे पहले फिर से ऑपरेशन सिंदूर का मुद्दा सामने आ…

सभी अधिकारी अचानक संघी हो गए

June 29, 2026

मध्य प्रदेश के नेता कैलाश विजयवर्गीय कई मामलों में बहुत सही नेता हैं। वे कई बार बहुत साफगोई से कोई बात कह जाते हैं। कई बार तो बहुत विवादित बयान भी देते हैं। एक बार फिर उनके एक बयान पर विवाद छिड़ा है। उन्होंने एक भाषण में कह दिया कि भाजपा की सरकार बनी तो…

सुनील शेट्टी और शर्मिष्ठा मुखर्जी को क्या चाहिए?

June 29, 2026

एक तरफ सरकार के अधिकारी आरएसएस से नजदीकी दिखाने की होड़ में लगे हैं तो दूसरी ओर सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग खुल कर सामने आ रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में कुछ भी कहने को तैयार हैं। उनके बीच अलग होड़ मची है कि कौन किन शब्दों में तारीफ कर सकता…

डीएमके से और दूर हो रही है कांग्रेस

June 29, 2026

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी अपनी दशकों पुरानी सहयोगी डीएमके से दूरी बढ़ाती जा रही है। पहले तो चुनाव समाप्त होते ही उसने डीएमके से संबंध समाप्त किया और टीवीके को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया। टीवीके प्रमुख विजय ने कांग्रेस को सरकार में शामिल किया और इस तरह तमिलनाडु में…

पासपोर्ट पर अनावश्यक विवाद !

June 29, 2026

अंतरराष्ट्रीय रूप से, पासपोर्ट राष्ट्रीयता का प्रतीक है, लेकिन यदि किसी की नागरिकता पर विवाद हो (जैसे आप्रवासन, आतंकवाद या दोहरी नागरिकता के मामले में), तो कोर्ट या सक्षम प्राधिकरण मूल दस्तावेजों: जन्म प्रमाण-पत्र, माता-पिता के दस्तावेज, प्राकृतिककरण प्रमाण आदि, की जांच करते हैं। भारत में यह स्थिति नई नहीं है; बॉम्बे हाईकोर्ट (2013) और…

logo