नितिन नबीन बदलाव नहीं निरंतरता हैं

भारतीय जनता पार्टी के 12वें अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की नियुक्ति हो गई है। भाजपा ने संगठन पर्व मना कर उनको अध्यक्ष के पद पर आसीन किया। पिछले महीने 14 दिसंबर को जब उनको कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया उस समय से यह चर्चा चल रही है भाजपा में ये ‘नबीन युग’ की शुरुआत… Continue reading नितिन नबीन बदलाव नहीं निरंतरता हैं

महाराष्ट्र के नतीजे का क्या संदेश है?

यह सवाल हो सकता है कि महाराष्ट्र की नगरपालिकाओं के चुनाव में ऐसा क्या है, जिसका राष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से विश्लेषण होना चाहिए? आखिर पिछले दिनों पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव हुए तो सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने क्लीन स्वीप किया तो तेलंगाना में भी स्थानीय निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने सफलता… Continue reading महाराष्ट्र के नतीजे का क्या संदेश है?

शिक्षक अब पढ़ाने के लिए नहीं हैं

शिक्षक का मूल कार्य अध्ययन और अध्यापन है। भारत के सरकारी स्कूलों के शिक्षक अध्ययन का काम पहले ही काफी हद तक छोड़ चुके थे और अब अध्यापन का काम भी नाममात्र का रह गया है। शिक्षक अब स्कूलों में पढ़ाने के लिए नहीं हैं, बल्कि पाठ्येत्तर कार्यों के लिए हैं। उनके ऊपर इतने कामों… Continue reading शिक्षक अब पढ़ाने के लिए नहीं हैं

पीके ने जो गंवाया उसे हासिल करने की चुनौती

सबसे पहले तो यह समझना होगा कि प्रशांत किशोर ने बिहार में क्या गंवाया है? वे मानें या नहीं मानें लेकिन एक कुशल चुनाव प्रबंधक के रूप में एक दशक में बनाई गई अपनी पूंजी उन्होंने बिहार में गंवा दी है। उनके दो सौ या चार सौ करोड़ रुपए खर्च हुए वह उनका बड़ा नुकसान… Continue reading पीके ने जो गंवाया उसे हासिल करने की चुनौती

बंगाल में भाजपा के पास सिर्फ नैरेटिव है

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले माहौल पूरा गरम है। केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने आजमाए हुए दांव के तौर पर चुनाव से ठीक पहले प्रदेश की भाजपा विरोधी पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस को केंद्रीय एजेंसियों के दम पर परेशान करने लगी है तो दूसरी ओर ममता बनर्जी अपनी आदत के मुताबिक सड़कों… Continue reading बंगाल में भाजपा के पास सिर्फ नैरेटिव है

भारत रत्न का मतलब संन्यास नहीं होता

बिहार और झारखंड दोनों जगह इन दिनों भारत रत्न की चर्चा बहुत हो रही है। रोचक बात यह है कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की चर्चा राजनीतिक कारणों से हो रही है। कुछ साल पहले तक भारत रत्न सम्मान को राजनीति से परे देखा जाता था। लेकिन अब यह राजनीति को प्रभावित करने वाला… Continue reading भारत रत्न का मतलब संन्यास नहीं होता

केरल में पहली बार लेफ्ट और कांग्रेस को चुनौती

पांच साल बीत जाने के बाद भी कांग्रेस यह नहीं समझ पाई है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में वह कैसे हारी। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 20 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की। राहुल गांधी अमेठी की पारंपरिक सीट से हार गए थे लेकिन केरल की वायनाड सीट… Continue reading केरल में पहली बार लेफ्ट और कांग्रेस को चुनौती

असम में क्या पूरी होगी कांग्रेस की उम्मीद?

अप्रैल में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होंगे, जिनमें से दो राज्य कांग्रेस की उम्मीदों के प्रदेश हैं। कांग्रेस को केरल और उसके साथ साथ असम से बहुत उम्मीदें हैं। कांग्रेस को लग रहा है कि 10 साल की सत्ता ने प्रदेश में भाजपा को अलोकप्रिय बनाया है और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भड़काऊ… Continue reading असम में क्या पूरी होगी कांग्रेस की उम्मीद?

तमिलनाडु में त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला

इस साल जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं उनमें पश्चिम बंगाल के बाद सबसे अहम तमिलनाडु का चुनाव है। हालांकि पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि डीएमके के नेतृत्व वाले सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस यानी एसपीए की राह आसान है और इस बार फिर सत्ता में उसकी वापसी हो सकती… Continue reading तमिलनाडु में त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला

चुनाव से बड़ी बंगाल की लड़ाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा की लड़ाई एक समान्य चुनावी लड़ाई नहीं है। यह उससे कहीं ज्यादा है। भारतीय जनता पार्टी और उसके दोनों सर्वोच्च नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है। मोदी और दीदी यानी नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी के कल्ट की ल़डाई है। भाजपा और भाजपा विरोध के… Continue reading चुनाव से बड़ी बंगाल की लड़ाई

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