प्रवासी बिहारियों की मुश्किलों का हल नहीं!

देश के अलग अलग हिस्सों से मीडिया और सोशल मीडिया में तस्वीरें आ रही हैं कि कैसे बिहार के लोग ट्रेन की बोगियों में घुसने के लिए स्टेशनों पर धक्कामुक्की कर रहे हैं। कैसे गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के स्टेशनों के बाहर लंबी लंबी कतारों में घंटों खड़े रह रहे हैं और उसके… Continue reading प्रवासी बिहारियों की मुश्किलों का हल नहीं!

पटाखे चलाना भी धर्म का काम!

इस साल भी और पिछले कई सालों से दिवाली के मौके पर ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ से ज्यादा ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ के संदेश देखने को मिले। अंधकार से प्रकाश की ओर चलने या असत्य से सत्य की ओर बढ़ने से ज्यादा हर व्यक्ति धर्म की रक्षा को आतुर दिखा और धर्म की रक्षा कैसे होगी? पटाखे… Continue reading पटाखे चलाना भी धर्म का काम!

जाति आधारित पार्टियां लोकतंत्र का भविष्य हैं!

क्या इसे भारत में अपनाई गई बहुदलीय लोकतंत्र के मजबूत होने का संकेत मानें या कुछ और कि भारत में लगातार राजनीतिक दलों की संख्या बढ़ रही है? हर चुनाव से पहले राज्यों में कई नई पार्टियां बनती हैं। हर पार्टी को कोई न कोई गठबंधन मिल जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर दो बड़े गठबंधन… Continue reading जाति आधारित पार्टियां लोकतंत्र का भविष्य हैं!

राहुल पर बढ़ती कांग्रेस की निर्भरता

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से राहुल गांधी पर निर्भर होती जा रही है। उनके बगैर कांग्रेस में न तो कोई फैसला हो पा रहा है और न कोई राजनीतिक गतिविधि चल पा रही है। यहां तक कि खुद राहुल की ओर से जो एजेंडा स्थापित किया जा रहा है उसको… Continue reading राहुल पर बढ़ती कांग्रेस की निर्भरता

चुनाव जीतने का बारीक प्रबंधन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने को बिहार की राजनीति के लिए तो अपरिहार्य बनाया ही है साथ ही उन्होंने बिहार की दोनों बड़ी राजनीतिक शक्तियों भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के लिए भी अपने को अपरिहार्य बनाया। उन्होंने बिहार की राजनीति को वह रूप दिया है, जिसमें किसी भी पार्टी की… Continue reading चुनाव जीतने का बारीक प्रबंधन

आसानी से विदा नहीं होंगे नीतीश

एक बार फिर नीतीश कुमार का समाधि लेख लिखा जा रहा है। पटना से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक विश्लेषक लिख रहे हैं कि नीतीश की लंबी राजनीतिक पारी का अंत आ गया है। एनडीए के सीट बंटवारे में भाजपा और जनता दल यू के बराबर सीटों पर लड़ने और चिराग पासवान की पार्टी को… Continue reading आसानी से विदा नहीं होंगे नीतीश

एक सक्षम फूड एंड ड्रग रेगुलेटर की जरुरत

भारत में खाने पीने की चीजों की गुणवत्ता की निगरानी करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई है। इसे 2006 में बनाया गया था और यह केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करता है। इसी तरह दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन… Continue reading एक सक्षम फूड एंड ड्रग रेगुलेटर की जरुरत

देश में कितने तरह का ‘जिहाद’!

पिछले दिनों एक नए किस्म के जिहाद के बारे में सुनने को मिला। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नकल जिहाद’ को कामयाब नहीं होने देना की हुंकार भरी है। असल में पिछले दिनों उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी यूकेएसएसएससी की परीक्षा का पेपर लीक हो गया। इस मामले में खालिद मलिक को… Continue reading देश में कितने तरह का ‘जिहाद’!

सरकार संवाद करे, जोर आजमाइश नहीं

जैसे ही कोई कहता है कि लद्दाख की घटना से सरकार को सबक लेना चाहिए वैसे ही उसको युवाओं को उकसाने वाला और देश विरोधी बताया जाने लगता है। लेकिन ऐसा नहीं है। लद्दाख की घटना से या उससे पहले पड़ोस के देशों बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल की घटना से या फ्रांस से लेकर ब्रिटेन… Continue reading सरकार संवाद करे, जोर आजमाइश नहीं

राहुल गांधी अपना काम कर रहे हैं

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के असली सर्वोच्च नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी क्या कुछ ऐसा कर रहे हैं, जो उनको नहीं करना चाहिए? यह बड़ा सवाल है क्योंकि वे जो कुछ भी करते हैं उस पर सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से सवाल उठाया जाता है और सोशल मीडिया में सक्रिय… Continue reading राहुल गांधी अपना काम कर रहे हैं

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