पहचान या विचार पर आधारित दल नहीं टूटते

यह बड़ा वाजिब सवाल है कि कुछ पार्टियां सत्ता से बाहर होते ही क्यों टूट जाती हैं, जबकि कुछ पार्टियां लंबे समय तक सत्ता के बगैर रहने के बावजूद नहीं टूटती हैं और अगर टूटती भी हैं तो उससे अलग होने वाला समूह कामयाब नहीं हो पाता है? चार साल के अंदर उद्धव ठाकरे की… Continue reading पहचान या विचार पर आधारित दल नहीं टूटते

नेता नहीं होंगे पर समाजवाद का विचार रहेगा

एक एक करके समाजवादी नेता भारतीय राजनीति के क्षितिज से विदा होते जा रहे हैं। जेडीएस के संस्थापक, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वास्तविक अर्थों में भारत के पहले एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर एचडी देवगौड़ा अब संसद में नहीं दिखेंगे। उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है। भाजपा पर निर्भर उनकी पार्टी फिर से उनको राज्यसभा में… Continue reading नेता नहीं होंगे पर समाजवाद का विचार रहेगा

विपक्ष में रह कर लड़े नहीं हैं मोदी

भारत की राजनीति का व्याकरण पिछले 12 साल में पूरी तरह से बदल गया है। सत्तारूढ़ दल और सरकार में अब कोई अंतर नहीं रह गया है। विपक्ष प्रतिद्वंद्वी की बजाय दुश्मन मान लिया गया है। समय के साथ विपक्ष के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल होता जा रहा है तो एंटी इन्कम्बैंसी की जगह प्रो… Continue reading विपक्ष में रह कर लड़े नहीं हैं मोदी

विपक्ष की मुश्किल होती लड़ाई

विपक्ष के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल होता जा रहा है। हर छोटे बड़े चुनाव के बाद उनके सामने नई चुनौतियां आ जा रही हैं। ऐसी चुनौती, जिनके बारे में कभी सोचा भी नहीं गया। सोचें, क्या कोई कल्पना कर सकता है कि एक समय ऐसा आएगा, जब विपक्षी उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा… Continue reading विपक्ष की मुश्किल होती लड़ाई

जनभावना का ध्यान रखने की जरुरत नहीं!

क्या भारतीय जनता पार्टी इतनी बड़ी और इतनी ताकतवर हो गई है उसे चुनाव जीतने के लिए जनभावना का ध्यान रखने की भी जरुरत नहीं है? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और अमित शाह का प्रबंधन इस स्तर तक पहुंच गया है कि जनभावना विपरीत होने के बावजूद वे भाजपा को चुनाव जिता दें?… Continue reading जनभावना का ध्यान रखने की जरुरत नहीं!

कोई चमत्कार ही बचाएगा विपक्ष को

लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास साधारण बहुमत है। इसे दो तिहाई करने की जैसी बेचैनी अभी दिख रही है वह थोड़े दिन पहले तक नहीं दिख रही थी। आखिर जून 2024 में आए लोकसभा चुनाव के नतीजों में ही भाजपा अकेले दम पर बहुमत हासिल करने से पीछे रह गई थी।… Continue reading कोई चमत्कार ही बचाएगा विपक्ष को

अमेरिका ने गंवाया, ईरान ने पाया

पश्चिम एशिया में ईरान की स्थिति 32 दांतों के बीच एक जीभ की तरह रही है। उसके चारों तरफ सुन्नी मुस्लिम देश हैं, जो किसी भी स्थिति में मजबूत ईऱान नहीं देखना चाहते। उसके निकट पड़ोस में इजराइल भी है, जो ईरान को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है। खाड़ी के एक दर्जन देशों… Continue reading अमेरिका ने गंवाया, ईरान ने पाया

सवाल सिर्फ तीन जिंदगियों का नहीं है

आदित्य शर्मा, उम्र 23 साल। शिवानंद चौरसिया, उम्र 37 साल। पटनाला सुरेश, उम्र 44 साल। ये तीन नाम हैं उन भारतीय नाविकों के, जो पालाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेत्तबेलो पर सवार थे, जिस पर अमेरिकी नौसेना ने मिसाइल से हमला किया और जहाज को डूबने के लिए छोड़ दिया। जहाज के नाविक बचाने… Continue reading सवाल सिर्फ तीन जिंदगियों का नहीं है

ममता की चुनौतियां सबसे अलग हैं

ममता बनर्जी पहली क्षत्रप नेता नहीं हैं, जिनकी पार्टी चुनाव हारी है और चुनाव हारने के बाद टूट रही है। उनसे पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना टूटी थी। उनके सांसद और विधायक सब अलग हो गए थे और पार्टी का नाम व चुनाव चिन्ह भी छिन गया था। हाल ही में अरविंद केजरीवाल… Continue reading ममता की चुनौतियां सबसे अलग हैं

जीडीपी के आंकड़े ध्यान से देखने की जरुरत

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े बहुत अच्छे रहे। देश की अर्थव्यस्था 7.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी। वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च के महीने में विकास की दर 7.8 फीसदी रही। ध्यान रह इस तिमाही का आखिरी महीना यानी मार्च का महीना पश्चिम एशिया… Continue reading जीडीपी के आंकड़े ध्यान से देखने की जरुरत

logo