इस बार बजट ऐसा ही होना था

इस बार बजट को लेकर जैसी उदासीनता रही वैसे हाल के दिनों में कई बजटों में नहीं देखने को मिली। बजट बिल्कुल सपाट और रूटीन का था और इसलिए बहुत जल्दी सामान्य चर्चा से बाहर हो गया। असल में यह बजट ऐसा ही होने वाला था। इसका कारण यह है कि यह नरेंद्र मोदी की… Continue reading इस बार बजट ऐसा ही होना था

महाराष्ट्र की राजनीति पहले जैसी नहीं रहेगी

अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा। ऐसा होना न तो अनायास होगा और न आश्चर्यजनक होगा। आमतौर पर इतने बड़े नेता का जब भी असमय निधन होता है या उसके साथ कोई हादसा होता है तो राजनीति बदलती है। कई राज्यों में इसके प्रमाण मिल जाएंगे। अरुणाचल प्रदेश में… Continue reading महाराष्ट्र की राजनीति पहले जैसी नहीं रहेगी

अगड़े, शंकराचार्य: ये भाजपा के प्रयोग है!

यह संयोग नहीं है कि करीब तीन साल तक आधा दर्जन से ज्यादा पिछड़ी जाति के नेताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा करने के बाद भाजपा ने अगड़ी जाति के नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया और उसके बाद यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के नाम पर ऐसा नियम पेश… Continue reading अगड़े, शंकराचार्य: ये भाजपा के प्रयोग है!

भाजपा की राजनीतिक योजना क्या है?

राजनीति में कुछ भी अनायास या अनियोजित नहीं होता है और अगर आपको लगे कि कुछ अनायास हो रहा है या अनप्लांड हो रहा है तो समझना चाहिए कि उसे उसी तरह से प्लान किया गया है। यानी उसकी योजना ऐसी बनी है कि वह अनप्लांड लगे। यह बात अमेरिका के एक राष्ट्रपति ने कही… Continue reading भाजपा की राजनीतिक योजना क्या है?

लोकभवन बना देने से क्या बदला?

प्रदेशों की राजधानियों में अंग्रेजों के जमाने में बने और कई कई एकड़ में फैले विशाल भवनों को, जहां राज्यपाल रहते हैं, राजभवन कहा जाए या लोकभवन क्या फर्क पड़ता है? लोकभवन नाम रख देने से न तो उसमें रहने वालों की उपयोगिता बढ़ जाएगी और न उनका एटीट्यूड बदल जाएगा। वे अंग्रेज के जमाने… Continue reading लोकभवन बना देने से क्या बदला?

पांच राज्यों में पहचान के मुद्दे पर चुनाव

राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के लिहाज से यह बहुत दिलचस्प समय दिख रहा है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी पैन इंडिया हिंदुत्व की राजनीति को स्थापित करने की बेहद आक्रामक राजनीति कर रही है। उसने 80 और 20 वाली राजनीति को उत्तर प्रदेश की सीमा से निकाल कर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पूरे देश… Continue reading पांच राज्यों में पहचान के मुद्दे पर चुनाव

नितिन नबीन बदलाव नहीं निरंतरता हैं

भारतीय जनता पार्टी के 12वें अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की नियुक्ति हो गई है। भाजपा ने संगठन पर्व मना कर उनको अध्यक्ष के पद पर आसीन किया। पिछले महीने 14 दिसंबर को जब उनको कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया उस समय से यह चर्चा चल रही है भाजपा में ये ‘नबीन युग’ की शुरुआत… Continue reading नितिन नबीन बदलाव नहीं निरंतरता हैं

महाराष्ट्र के नतीजे का क्या संदेश है?

यह सवाल हो सकता है कि महाराष्ट्र की नगरपालिकाओं के चुनाव में ऐसा क्या है, जिसका राष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से विश्लेषण होना चाहिए? आखिर पिछले दिनों पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव हुए तो सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने क्लीन स्वीप किया तो तेलंगाना में भी स्थानीय निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने सफलता… Continue reading महाराष्ट्र के नतीजे का क्या संदेश है?

शिक्षक अब पढ़ाने के लिए नहीं हैं

शिक्षक का मूल कार्य अध्ययन और अध्यापन है। भारत के सरकारी स्कूलों के शिक्षक अध्ययन का काम पहले ही काफी हद तक छोड़ चुके थे और अब अध्यापन का काम भी नाममात्र का रह गया है। शिक्षक अब स्कूलों में पढ़ाने के लिए नहीं हैं, बल्कि पाठ्येत्तर कार्यों के लिए हैं। उनके ऊपर इतने कामों… Continue reading शिक्षक अब पढ़ाने के लिए नहीं हैं

पीके ने जो गंवाया उसे हासिल करने की चुनौती

सबसे पहले तो यह समझना होगा कि प्रशांत किशोर ने बिहार में क्या गंवाया है? वे मानें या नहीं मानें लेकिन एक कुशल चुनाव प्रबंधक के रूप में एक दशक में बनाई गई अपनी पूंजी उन्होंने बिहार में गंवा दी है। उनके दो सौ या चार सौ करोड़ रुपए खर्च हुए वह उनका बड़ा नुकसान… Continue reading पीके ने जो गंवाया उसे हासिल करने की चुनौती

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