संसद की गरिमा कैसे सुनिश्चित होगी?

Categorized as अजित द्विवेदी कालम

भारत में किसी भी चीज को नष्ट करने के कई तरीकों में से एक तरीका यह है कि उसे पवित्र बना दिया जाए। उसे पूजा के योग्य बना दिया जाए। जैसे ही हमारे यहां कहा जाए कि अमुक चीज तो पवित्र है और हम उसकी पूजा करते हैं तो समझ लें कि वह चीज ज्यादा समय तक नहीं रहने वाली है। उसका नष्ट होना अवश्यम्भावी है। मिसाल के तौर पर भारत में नदियों की स्थिति देखी जा सकती है। नदियों को भारत में माता का दर्जा दिया जाता है और पूजा की जाती है लेकिन पूजा करने वाला व्यक्ति भी नदी की साफ सफाई और उसकी पवित्रता का ध्यान नहीं रखता है। सारा कचरा नदियों में जाता है, लोगों के घरों के गंदे नाले नदियों में जाते हैं, औद्योगिक इकाइयों का कचरा नदियों में गिरता है, इसके अलावा और क्या क्या होता वह लिखने की जरुरत नहीं है। सरकारें हजारों करोड़ रुपए खर्च करती हैं और किसी भी नदी की सफाई नहीं हो पाती है।

ऐसे ही हमलोगों ने पहाड़ों को पूजना शुरू किया और अपने लालच में उनकी ऐसी खुदाई शुरू की या पहाड़ काट कर ऐसे निर्माण शुरू किए कि हर पर्वत शृंखला अस्तित्व का संकट झेल रही है। इसी तरह भारत में पेड़ों की पूजा होती है और फिर ऐसी अंधाधुंध कटाई होती है कि लाखों, करोड़ों हेक्टेयर में फैले जंगल समाप्त हो गए। हम अपनी देवियों की पूजा करते हैं और हमारे घरों में स्त्रियों की क्या स्थिति है यह राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं। ऐसी अनेक मिसालें और भी दी जा सकती हैं। लेकिन विषय को समझने के लिए इतना पर्याप्त है।

इतनी लंबी भूमिका की जरुरत इसलिए थी क्योंकि इस समय देश में संसद की पवित्रता की बहस चल रही है। बहुत सारे लोगों की भावनाएं इस बात से आहत हैं कि राहुल गांधी संसद की सीढ़ियों पर समोसे खा रहे थे और चाय पी रहे थे। असल में कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने लोकसभा से निलंबित सांसदों के साथ मकर द्वार के पास बैठ कर समोसे खाए थे और चाय पी थी। इसे लेकर भाजपा के सांसदों ने नाराजगी जताई तो देश के दो सौ से ज्यादा कथित गणमान्य लोगों के चिट्ठी लिखने की भी खबर आई, जिसमें राहुल गांधी के व्यवहार को संसद की गरिमा के विरूद्ध बताया गया और उनकी आलोचना की गई। इससे पहले भाजपा के सांसदों ने तृणमूल के एक बुजुर्ग सांसद की शिकायत स्पीकर से की थी, जिसमें कहा गया है कि वे संसद परिसर में सिगरेट पी रहे थे। संसद के अंदर ई सिगरेट पीने की शिकायत भी की गई। ऐसे ही कांग्रेस की एक सांसद कुत्ता लेकर संसद परिसर में आ गई थीं तो उसकी भी बड़ी आलोचना हुई थी।

इसमें से ज्यादातर घटनाएं सामान्य मानवीय व्यवहार से जुड़ी हैं। हो सकता है कि किसी सांसद के सामान्य मानवीय व्यवहार से कोई दूसरा सदस्य आहत हो जाए। जैसे फिल्म अभिनेत्री से सांसद बनीं भाजपा की एक नेता को राहुल गांधी का व्यवहार ‘टपोरी’ जैसा लगता है और उनका दावा है कि राहुल गांधी को देख कर महिला सांसद असहज हो जाती हैं। ऐसे ही राहुल गांधी या किसी अन्य सांसद के सीढ़ियों पर खाना खाने से या संसद परिसर में सिगरेट पीने से कुछ लोगों की भावनाएं आहत होती हों। लेकिन इससे संसद की गरिमा और पवित्रता नष्ट होती है, ऐसा नहीं माना जा सकता है। आखिर संसद के अंदर भी खाने की कैंटीन है। लोग खाना खाते हैं। कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर पूरी रात धरना दिया तो वे उन्होंने वही खाना खाया और वही पर सोए। पहले भी ऐसा होता रहा है। इसलिए ऐसी बातों का मुद्दा बना कर विपक्ष के नेताओं को गैरजिम्मेदार, अगंभीर और गरिमामय आचरण नहीं करने का दोषी तो बताया जा सकता है लेकिन इसे संसद की गरिमा और पवित्रता के विरूद्ध बताना उचित नहीं है।

संसद की गरिमा और पवित्रता ऐसी चीजों से तय नहीं होती हैं। संसद की गरिमा और पवित्रता इससे तय होती है कि संसद में किस तरह के विधायी कामकाज होते हैं। देश के 140 करोड़ से ज्यादा लोगों का भाग्य तय करने वाले लोग वहां बैठते हैं, वे कैसे इतने लोगों की किस्मत तय करने वाले फैसले करते हैं, इससे संसद की गरिमा तय होती है। संसद के सदस्य सदन के अंदर किस तरह का आचरण करते हैं, किस तरह संवाद करते हैं, किस तरह की बहस करते हैं इससे तय होगा कि संसद का कितना सम्मान है और कितनी गरिमा है। संसद के संचालन में पक्ष और विपक्ष के बीच समन्वय बनता है या नहीं या सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष को अपनी बात रखने का स्पेस दिया जाता है या नहीं इससे तय होगा कि संसद कितनी पवित्र है। इसमें पक्ष और विपक्ष दोनों के ही सांसदों का आचरण शामिल है।

संसद में जरूरी मसलों पर चर्चा नहीं हो। 140 करोड़ लोगों की किस्मत तय करने वाले विधेयक मिनटों में बिना किसी बहस के पास हो जाएं। विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जाए या बोलने से रोका जाए। विधेयकों को संसदीय समितियों के सामने नहीं भेजा जाए या संसदीय समितियों की रिपोर्ट्स को गंभीरता से नहीं लिया जाए। संसदीय समितियों में बहुमत के दम पर हर बार सरकार के पक्ष को स्वीकार किया जाए और विपक्ष की मांग खारिज हो। विधेयकों पर विपक्ष की आपत्तियों को बिना चर्चा के खारिज कर दिया जाए। तब संसद की गरिमा प्रभावित होती है। कानून की गुणवत्ता और उसके व्यापक असर में कोई कमी रह जाए तो संसद की गरिमा पर आंच आती है। इसकी बजाय अगर चर्चा इस दिशा में चली जाए कि अमुक नेता टीशर्ट पहन कर सदन में आता है या अमुक नेता सीढ़ियों पर बैठ कर खा रहा था तो समझ लेना चाहिए कि कुछ बुनियादी गड़बड़ी है। ऐसे मामले आमतौर पर ध्यान भटकाने या किसी नेता की साख बिगाड़ने के लिए उछाले जाते हैं। उनका संविधान की ओर से विधायिका के लिए निर्धारित भूमिका से कोई लेना देना नहीं होता है।


Previous News Next News

More News

‘युवा भारतीय गढ़ रहे देश-दुनिया का भविष्य’, प्रधानमंत्री मोदी

June 13, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि एनडीए सरकार युवाओं के नेतृत्व वाले विकास को मजबूत रूप से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि यह देखकर प्रसन्नता होती है कि युवा भारतीय उन क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं जो हमारे देश और दुनिया के भविष्य को आकार देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के…

दिल्ली में 500 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वालों पर बढ़ेगा बिल का बोझ

June 13, 2026

दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में बड़ा झटका लग सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) को अप्रैल 2026 के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (पीपीएसी) वसूलने की अनुमति…

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे अगले सेना प्रमुख

June 13, 2026

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को केंद्र सरकार ने भारतीय सेना का अगला प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) नियुक्त किया है। धीरज सेठ मौजूदा आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे। 30 जून को आर्मी स्टाफ के मौजूदा चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन रिटायर हो रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ नेशनल डिफेंस एकेडमी,…

‘मां-बहन’: रिश्तों की गालियों से गरिमा तक की सिनेमाई यात्रा

June 13, 2026

यहां स्त्री-विमर्श है, लेकिन नारेबाज़ी नहीं। यहां सामाजिक टिप्पणी है, लेकिन उपदेश नहीं। यहाँ संवेदनशीलता है, लेकिन भावुकता का अतिरेक नहीं। तकनीकी पक्ष की बात करें तो फ़िल्म का कैमरा वर्क कहानी के स्वभाव के अनुरूप है। चमक-दमक से दूर, वास्तविक जीवन के करीब। फ्रेम्स में एक तरह की घरेलू घुटन भी है और आत्मीयता…

ट्रंप ने ईरान युद्ध खत्म किया

June 13, 2026

नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त कर दिया है। युद्ध शुरू होने के करीब ढाई महीने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है। इसके साथ ही सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई है कि रविवार…

logo