बांग्लादेश से संबंध

बांग्लादेश के साथ भारत की कूटनीति का तीसरा पहलू क्षेत्रीय भू राजनीति से जुड़ा है। बांग्लादेश भारत की पड़ोसी पहले की नीति का मुख्य केंद्र रहा है। कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सहयोग, जल बंटवारा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की परस्पर निर्भरता गहरी है। शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की भारत की विदेश नीति पिछले… Continue reading बांग्लादेश से संबंध

ओपन सोर्स का झटका

लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर पैनल का आविष्कार अमेरिका में हुआ, लेकिन उनमें कारोबारी दौड़ चीन ने जीती। हाई-टेक चमत्कार को उसने सस्ते माल में बदल दिया, जिससे पश्चिमी कंपनियां होड़ से बाहर हो गईं। चीन यही नजरिया एआई क्षेत्र में अपना रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट की शुरुआत से ठीक पहले चीन की कंपनी बाइटडांस… Continue reading ओपन सोर्स का झटका

अनिश्चय से परेशान यूरोप

यूरोपीय देशों की मुश्किल यह है कि अमेरिका का साया उन पर नहीं रहा, रूस से उनकी दुश्मनी है, और चीन को वे अपने आर्थिक हितों के लिए खतरा मानते हैं। जबकि आज की दुनिया में यही सबसे बड़ी ताकतें हैं। पिछले महीने दावोस में हुए वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम के बाद अब जर्मनी में हुए… Continue reading अनिश्चय से परेशान यूरोप

राफेल पर ही दांव

बड़ी ताकतें अपनी कंपनियों को सौदा दिलवाने के लिए भारत को महज एक बाजार के रूप में देखती हैं। मगर भारत को उनके दबाव में नहीं आना चाहिए। यह भी जरूरी है कि सौदा पारदर्शी हो, ताकि उसको लेकर विवाद पैदा ना हो। फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का फैसला तत्कालीन यूपीए सरकार… Continue reading राफेल पर ही दांव

इम्पैक्ट एआई समिट का

बेशक, नई दिल्ली में इस इवेंट का आकार पिछले तीन शिखर सम्मेलनों से बड़ा है। कहा गया है कि इसके जरिए भारत संदेश देना चाहता है कि एआई के क्षेत्र में वह एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग को यथासंभव विनियमित करने के मकसद से ब्रिटेन में 2023… Continue reading इम्पैक्ट एआई समिट का

बांग्लादेश में क्या बदला?

जमात-ए-इस्लामी और अवामी लीग की स्थिति में बुनियादी बदलाव बांग्लादेश में आए असल बदलाव का संकेत है। ये परिवर्तन सिरे से नकारात्मक है। इससे आवाम का कोई भला नहीं होगा। बल्कि उन्हें धर्मांधता की खाई में झोंकने की प्रवृत्तियां और हावी होंगी। बांग्लादेश में अगस्त 2024 से अब तक के घटनाक्रम के अध्ययनकर्ता इसी नतीजे… Continue reading बांग्लादेश में क्या बदला?

मणिपुर में सांप्रदायिक जहर

राजनेताओं को स्वार्थ से उठ कर समस्या पर विचार करना चाहिए। समाज में सांप्रदायिक भावनाओं के कारण व्यक्तिगत रिश्ते तनाव में आ रहे हों, तब थोपी गई एकता कारगर नहीं हो सकती। जरूरत पहले सामाजिक दुराव खत्म करने की है। पिछले महीने मणिपुर चूराचंदपुर में 31 वर्षीय मयंगलम्बम सिंह का अपहरण कर हत्या कर दी… Continue reading मणिपुर में सांप्रदायिक जहर

राष्ट्रीय सुरक्षा की ठेकेदारी?

यह समझ समस्याग्रस्त है कि सेना में अपनी पूरी कामकाजी जिंदगी गुजारने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा की परवाह नहीं करते अथवा सत्तासीन लोग विपक्षी दलों या नेताओं की तुलना में राष्ट्रीय सुरक्षा के अधिक बड़े पहरुआ हैं। पूर्व सेनाध्यक्ष एम.एम. नरावणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर उठे विवाद के बाद अब खबर… Continue reading राष्ट्रीय सुरक्षा की ठेकेदारी?

सही समय पर विराम

कांग्रेस की मुश्किल यह है कि समर्थन आधार बढ़ाने की कोई कार्ययोजना उसके पास नहीं है। उसके नेता और कार्यकर्ता राजनीति की धूल-धक्कड़ में नहीं उतरना चाहते। वे नफ़ासत से सियासत करते हैं, जिसका परिणाम जनाधार का सिकुड़ते जाना है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करने की संभावना… Continue reading सही समय पर विराम

मुद्दे से ना भटकें

देश के सामने असल सवाल वो ब्योरा है, जो जनरल नरावणे ने लद्दाख क्षेत्र में 2020 में हुई घटनाओं के बारे में दिया है। उन घटनाओं से भारतीय सेना के अंदर कमान शृंखला को लेकर प्रश्न उठे हैं। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरावणे की कथित रूप से अप्रकाशित किताब कैसे छपे रूप में और… Continue reading मुद्दे से ना भटकें

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