ओपन सोर्स का झटका

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लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर पैनल का आविष्कार अमेरिका में हुआ, लेकिन उनमें कारोबारी दौड़ चीन ने जीती। हाई-टेक चमत्कार को उसने सस्ते माल में बदल दिया, जिससे पश्चिमी कंपनियां होड़ से बाहर हो गईं। चीन यही नजरिया एआई क्षेत्र में अपना रहा है।

एआई इम्पैक्ट समिट की शुरुआत से ठीक पहले चीन की कंपनी बाइटडांस ने वीडियो बनाने में सक्षम नया ओपन सोर्स एआई मॉडल लॉन्च किया, जिससे डीपसीक से मिलती-जुलती सनसनी दुनिया में फैली। सीडडांस 2.0 नाम का ये मॉडल टेक्स्ट, तस्वीर, ऑडियो और वीडियो की एक साथ प्रोसेसिंग में सक्षम बताया गया है। इससे फिल्म निर्माण, ई-कॉमर्स, और विज्ञापन संबंधी उत्पादों को डिजाइन करना सस्ता हो जाएगा। इस घटनाक्रम ने अमेरिका में एआई सेक्टर में हो रहे विशाल निवेश की उपयोगिता पर फिर बहस खड़ी की है। अमेरिकी मॉडल आविष्कार को बौद्धिक संपदा में तब्दील कर मुनाफा कमाने के नजरिए पर केंद्रित है।

इसीलिए वहां इस क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश किया गया है, जिसे अनेक अर्थशास्त्री एआई बुलबुला कहते हैं। वहां की कंपनियां इस सोच को लेकर अपना भविष्य दांव पर लगा रही हैं कि उच्च-गुणवत्ता वाला एआई हमेशा एक लग्जरी प्रोडक्ट रहेगा। मगर  चीनी के ओपन-सोर्स डेवलपर्स दिखा रहे हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वास्तव में एक सामान्य वस्तु है। इस सिलसिले में ये उदाहरण दिया गया है कि लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर पैनल का आविष्कार अमेरिका में हुआ, लेकिन उनमें कारोबार की दौड़ चीन ने जीती। ऐसा उसने बेहतर आविष्कार के जरिए नहीं किया, बल्कि विशाल पैमाने पर उत्पादन के जरिए बाजार में उसने अपने पांव फैला लिए। यानी हाई-टेक चमत्कार को सस्ते माल में बदल दिया, जिससे पश्चिमी प्रतिस्पर्धी कंपनियां होड़ से बाहर हो गईं। चीनी कंपनियां यही नजरिया एआई के मामले मे अपना रही हैं। मसलन, डीपसीक का रिजनर मॉडल लगभग 55 सेंट प्रति टोकन कीमत पर उपलब्ध है, तो वैसे में लगभग साढ़े पांच डॉलर में चैट जीपीटी के टोकन लेने में कितने लोगों की दिलचस्पी होगी? इसलिए एआई बुलबुले के फूटने की आशंकाएं गहराती चली जा रही हैं। पिछले महीने भारतीय संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में इस घटनाक्रम को लेकर चेतावनी दी गई थी। कहा गया कि अमेरिका में एआई बुलबुला फूटा, तो उसका बहुत खराब असर भारत जैसे देशों पर भी होगा। अभी जबकि नई दिल्ली में एआई समिट में तमाम तरह की बातें हो रही हैं, इस बुनियादी पहलू को याद रखना बेहद जरूरी है।


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