बांग्लादेश से संबंध

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बांग्लादेश के साथ भारत की कूटनीति का तीसरा पहलू क्षेत्रीय भू राजनीति से जुड़ा है। बांग्लादेश भारत की पड़ोसी पहले की नीति का मुख्य केंद्र रहा है। कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सहयोग, जल बंटवारा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की परस्पर निर्भरता गहरी है।

शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की भारत की विदेश नीति पिछले कुछ दशकों में पूरी तरह से विफल हो गई थी। लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों में तनाव आ गया था। अब भारत ने नए सिरे से संबंध सुधार के प्रयास शुरू किए हैं। बांग्लादेश के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथ समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए। वे अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिट्ठी लेकर गए थे। प्रधानमंत्री ने उनको भारत आने का न्योता दिया है। यह सिर्फ औपचारिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह एक सुविचारित कूटनीतिक पहल भी है। यह पहल दोपक्षीय संबंधों की निरंतरता और उच्च स्तरीय राजनीतिक विश्वास को दिखाता है। दूसरी ओर इसी यात्रा में भारत के विदेश सचिव का बांग्लादेश के प्रमुख विपक्षी नेता और जमात ए इस्लामी के प्रमुख शफीकुर्रहमान से मिलना इस बात का संकेत है कि भारत अपनी नीति को बहुस्तरीय और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ा रहा है।

भारत की एक बहुत अच्छी कूटनीतिक पहल यह रही कि किसी केंद्रीय मंत्री को भेजने की बजाय लोकसभा के स्पीकर को शपथ समारोह में भेज गया। यह दो देशों के संबंधों की भावना को रेखांकित करता है। स्पीकर का पद दलीय राजनीति से ऊपर माना जाता है, इसलिए यह संदेश गया कि भारत की प्रतिबद्धता सिर्फ किसी एक दल या सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्थागत संबंधों को महत्व देता है। प्रधानमंत्री का पत्र और भारत आने का निमंत्रण इस बात का संकेत है कि नई सरकार के साथ संवाद को जल्दी से जल्दी और सकारात्मक दिशा में ले जाने की भारत की मंशा है। दूसरी रणनीतिक पहल विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बांग्लादेश के विपक्षी नेता से मुलाकात है। शफीकुर्रहमान, बांग्लादेश की कट्टरपंथी जमात ए इस्लामी के प्रमुख हैं। जमात को पहली बार बांग्लादेश की तीन सौ सदस्यों की संसद में करीब 70 सदस्यों का प्रतिनिधित्व मिला है। यह एक तरह से उसकी राजनीतिक वैधता है। उनसे मुलाकात कर भारत ने यह स्पष्ट किया कि वह केवल सत्तारूढ़ दल पर निर्भर रहकर अपनी विदेश नीति नहीं गढ़ता, बल्कि संभावित सत्ता परिवर्तन की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखता है। हालांकि बांग्लादेश में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी को जबरदस्त जनादेश मिला है लेकिन बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा का मसला वहां के समाज से जुड़ा है और उसे सुनिश्चित करने के लिए जमात के नेता के साथ भारत के संबंधों की बेहतरी भी जरूरी है।

बांग्लादेश के साथ भारत की कूटनीति का तीसरा पहलू क्षेत्रीय भू राजनीति से जुड़ा है। बांग्लादेश भारत की पड़ोसी पहले की नीति का मुख्य केंद्र रहा है। कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सहयोग, जल बंटवारा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की परस्पर निर्भरता गहरी है। हालांकि अभी भारत गंगा जल संधि या ट्रांस शिपमेंट पर लगाई गई रोक को लेकर कुछ नहीं कह रहा है और न शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपने की बात हो रही है। लेकिन आने वाले दिनों में ये मुद्दे उठेंगे। इन मुद्दों पर सद्भावपूर्ण तरीके से चर्चा हो यह भारत ने अपनी कूटनीतिक पहल से सुनिश्चित किया है। सीमा प्रबंधन और घुसपैठ रोकने में भी भारत को बांग्लादेश के साथ बेहतर समन्वय की जरुरत होगी।


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