राफेल पर ही दांव

Categorized as संपादकीय

बड़ी ताकतें अपनी कंपनियों को सौदा दिलवाने के लिए भारत को महज एक बाजार के रूप में देखती हैं। मगर भारत को उनके दबाव में नहीं आना चाहिए। यह भी जरूरी है कि सौदा पारदर्शी हो, ताकि उसको लेकर विवाद पैदा ना हो।

फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का फैसला तत्कालीन यूपीए सरकार ने किया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने उसे आगे बढ़ाया, लेकिन उन्होंने खरीदारी की शर्तों में उलटफेर कर दी। इसी कारण मोदी सरकार ने जब पहली बार राफेल विमानों को खरीदा, तो उस सौदे पर ना सिर्फ भारत, बल्कि फ्रांस में भी बड़े विवाद हुए। दोनों जगहों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। मगर वह दीगर मामला है। उस विवाद को विमानों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल टिप्पणी नहीं माना जाएगा। हां, पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने कई भारतीय राफेल विमानों को मार गिराने का दावा किया था, तो जरूर विमानों की तत्परता से संबंधित प्रश्न उठे।

बहरहाल, उस दावे की सच्चाई क्या है, इस बारे में भारत सरकार ने अभी तक कुछ नहीं कहा है। इस बीच चार दिन के उस सीमित युद्ध ने भारत की रक्षा तैयारियों में और दम लगाने की जरूरत निर्विवाद रूप से जाहिर किया। यह भी साफ हुआ कि आगे की लड़ाइयों में वायु सेना की प्रमुख भूमिका होगी। अतः भारतीय वायु सेना की लड़ाकू विमानों की जरूरत को पूरा करना अनिवार्य है। अब केंद्र ने 114 राफेल विमानों को खरीदने का जो फैसला किया है, उसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। फ्रेंच कंपनी दसॉ के राफेल विमान उन्नत तकनीक से लैस हैं, यह आम धारणा है। चूंकि भारत के पास पहले ये विमान हैं, इसलिए उन्हें ही खरीदना भी सही निर्णय माना जाएगा।

अब समझ यह बनी है कि आधुनिक हथियार एवं उपकरण उच्च तकनीक से संचालित हैं, वैसे में एक जैसे सिस्टम अधिक कारगर हो रहे हैं। इसलिए भारत को अलग-अलग देशों से सिस्टम खरीदने की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। बड़ी ताकतें अपनी कंपनियों को सौदा दिलवाने के लिए भारत जैसे देशों को महज एक बाजार के रूप में देखती हैं। मगर भारत को उनके दबाव में नहीं आना चाहिए। उसे अपनी जरूरतों के अनुरूप सौदे करने चाहिए। फिर यह भी जरूरी है कि हर सौदा पारदर्शी हो, ताकि उसको लेकर उस तरह का संदेह पैदा ना हो, जैसा पिछले राफेल सौदे के समय हुआ था।


Previous News Next News

More News

प्रहलाद जोशी के जरिए बड़ा संदेश

July 29, 2026

ऐसी चर्चा थी कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देंगे तो डॉक्टर जितेंद्र सिंह को उनकी जगह शिक्षा का प्रभार दिया जाएगा। यह अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान वे सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। प्रधानमंत्री आवास के सामने राहुल गांधी के…

अब ई-20 पार्टी बन कर तैयार है

July 29, 2026

सरकार अभी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से मिले जख्मों को सहला ही रही है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 पेट्रोल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए ई-20 पार्टी का गठन हो गया है। इस पार्टी को सोशल मीडिया में पर्याप्त समर्थन भी मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी…

क्या दिपके राजनीतिक पार्टी बनाएंगे?

July 29, 2026

अभिजीत दिपके और उनके नजदीकी लोग जैसे आशुतोष रांका और सौरव दास दावा कर रहे हैं कि अभी राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है और न चुनाव लड़ना है। लेकिन असल में दिपके और उनकी टीम राजनीतिक दल बनाएंगे। ध्यान रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग खास कर…

पीके से पूरा एनडीए लड़ रहा है

July 29, 2026

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए दुःस्वप्न साबित हो रहा है। भाजपा के कई नेता कह रहे हैं कि नितिन नबीन को सीट से इस्तीफा नहीं देना चाहिए थे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बाद वे राज्यसभा चले गए और उन्होंने बांकीपुर सीट से इस्तीफा दे दिया। इसकी वजह…

कॉकरोच: एक शब्द का बल

July 29, 2026

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने दिया था। उन के शब्दों ने हिटलर के सामने पस्त हो रहे इंग्लैंड को बल दिया। इस हद तक कि कई यूरोपीय देशों को टिके रह कर लड़ने का हौसला मिला।…. चर्चिल ने अंग्रेजी भाषा को बुलाया और उसे युद्धभूमि में उतार दिया।” आज कम…

logo