शरद पवार अब नहीं छोड़ेंगे राजनीति

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मराठा क्षत्रप शरद पवार ने 85 साल की उम्र में राजनीति से संन्यास लेने का इरादा बना लिया था। लेकिन ऐसा लग रहा है कि नियति को उनकी यह योजना रास नहीं आई। कहा जा रहा है कि शरद पवार अब राजनीति से संन्यास नहीं लेने जा रहे हैं। वे इस बार फिर राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनका राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। गौरतलब है कि 2009 से उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ना बंद कर दिया था। उनकी पारंपरिक बारामती सीट से उनकी बेटी सुप्रिया सुले चार चुनाव से जीत रही हैं। खुद शरद पवार राज्यसभा में चले गए थे। इस बार कहा जा रहा था कि वे राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे और सक्रिय राजनीति को अलविदा कह देंगे। कम से कम संसदीय राजनीति छोड़ देने की निश्चित चर्चा थी। लेकिन भतीजे अजित पवार के निधन के बाद सारी चीजें बदल गई हैं। तभी कहा जा रहा है कि अगले महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव में शरद पवार भी लड़ेंगे।

शरद पवार क्यों लड़ेंगे यह अहम सवाल है लेकिन साथ ही यह भी सवाल है कि वे लड़ेंगे तो जीतेंगे कैसे? यह भी सवाल है कि वे अपनी एनसीपी की तरफ से लड़ेंगे या निर्दलीय चुनाव में उतरेंगे? निर्दलीय का सवाल इसलिए आया है क्योंकि पिछले दिनों उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कई नेता निर्दलीय चुनाव लड़ कर भी राज्यसभा सांसद बनते रहे हैं। वे चाहे जिस रूप में लड़ें लेकिन महाराष्ट्र का समीकरण बहुत आसान नहीं है। महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटें खाली हो रही हैं। 288 सदस्यों की विधानसभा के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए 37 वोट की जरुरत होगी। शरद पवार की अपनी पार्टी के पास सिर्फ 10 विधायक हैं। विपक्षी गठबंधन यानी महाविकास अघाड़ी के पास कुल 48 विधायक हैं। इसमें उद्धव ठाकरे की शिव सेना के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं। इनको मिला कर एक सीट जीती जा सकती है। ध्यान रहे कांग्रेस की रजनी पाटिल और उद्धव ठाकरे की शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी भी रिटायर हो रही हैं। अगर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे दोनों अपने उम्मीदवारको छोड़ कर शरद पवार का समर्थन करें तो वे आसानी से राज्यसभा चले जाएंगे।

लेकिन सवाल है कि क्या शरद पवार कुछ नया खेल कर सकते हैं? अजित पवार की पार्टी के पास 40 विधायक हैं। इस लिहाज से एक सीट उनकी बनती है। सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्यसभा की एक सीट खाली हुई है, जिस पर उनके बेटे पार्थ पवार को उच्च सदन भेजे जाने की चर्चा है। क्या शरद पवार अजित पवार की पार्टी को मिलने वाली दो में एक सीट ले सकते हैं? कुछ और सवाल हैं, जिनका जवाब राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद ही मिल पाएगा। एनसीपी के दोनों खेमों के जानकार नेताओं का कहना है कि अजित पवार के साथ दोनों पार्टियों के विलय की बात चल रही थी। इस पर लगभग सहमति बन गई थी कि विलय के बाद अजित पवार पार्टी का नेतृत्व करेंगे। सुप्रिया सुले दिल्ली की राजनीति करेंगी। लेकिन अब सारी चीजें बदल गई हैं। अब दोनों पार्टियों के विलय का मामला खटाई में पड़ गया है और इसके साथ ही शरद पवार की बेटी का राजनीतिक भविष्य भी अधर में लटक गया है। तभी कहा जा रहा है कि शरद पवार ने कुछ दिन और सक्रिय राजनीति करने का फैसला किया है।


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