वोट खरीद की योजनाएं

बुजुर्गों को पेंशन मिले, यह कल्याणकारी सोच है। मगर ऐसी सामाजिक सुरक्षा सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को क्यों मिलनी चाहिए? सरकारी कर्मचारियों को एक अलग सुविधा-प्राप्त वर्ग के रूप में रखने के प्रयासों के दुष्परिणाम पहले भी सामने आ चुके हैं। बिहार की तर्ज पर असम सरकार ने भी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के… Continue reading वोट खरीद की योजनाएं

खेल में बिगड़ती बात

बीसीसीआई ने गड़बड़झाला किया। क्या अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों को लेकर भारत को बांग्लादेश से क्रिकेट संबंध तोड़ लेना चाहिए? बीसीसीआई ऐसा सोचती है, तो फिर उसने बांग्लादेश के खिलाड़ियों को आईपीएल नीलामी में क्यों शामिल किया? टी-20 वर्ल्ड कप में खेलने के लिए भारत ना आने का बांग्लादेश का एलान क्रिकेट और भारत दोनों… Continue reading खेल में बिगड़ती बात

अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर प्रहार

ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के खिलाफ जो तर्क दिया है, आशंका है कि वह वैसी ही दलील ग्रीनलैंड, क्यूबा, मेक्सिको और यहां तक कि कनाडा के खिलाफ भी गढ़ सकता है। इसीलिए इस हमले से अधिकांश देशों के कान खड़े हुए हैं। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के आसपास सैन्य दबाव कई महीनों से बना… Continue reading अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर प्रहार

प्रतिभा नहीं काफी पर्याप्त

यह प्रश्न हमेशा मौजूद रहा है कि भारत पदक तालिका में अपनी मौजूदा दयनीय स्थिति से कैसे उबरे। बिंद्रा समिति इसका मूलमंत्र बताया है कि खेल प्रशासन को पेशेवर बनाना, जिसमें जवाबदेही तय करने की करने की ठोस व्यवस्था हो। सिर्फ प्रतिभा की बदौलत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल में सफलता कभी- कभार ही मिल सकती… Continue reading प्रतिभा नहीं काफी पर्याप्त

माली मुश्किलों का आईना

प्रधानमंत्री के साथ अर्थशास्त्रियों की बजट पूर्व बैठक में अर्थव्यवस्था की मुश्किलें खुल कर सामने आईं। अर्थशास्त्रियों ने ब्याज चुकाने की बढ़ी देनदारी, कमजोर होती घरेलू बचत, और सरकार के बढ़े पूंजीगत निवेश से आई दिक्कतों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के साथ बजट पूर्व बैठक में उपस्थित अर्थशास्त्रियों ने अर्थव्यवस्था में पैदा हुई मुश्किलों का… Continue reading माली मुश्किलों का आईना

नया साल, पुरानी चुनौतियां

नव वर्ष में प्रवेश के अवसर पर सचमुच संकल्प लिया जाए, तो अमन-चैन का लक्ष्य असंभव नहीं है। यह तो अवश्य सुनिश्चित किया जा सकता है कि जब 2026 विदा लेगा, तब हम आज से बेहतर एवं अधिक स्थिर हाल में हों! नव वर्ष के आरंभ पर यह कामना स्वाभाविक है कि 2026 भारत के… Continue reading नया साल, पुरानी चुनौतियां

शासक इतने क्यों भयभीत?

हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि भविष्य में संभावित आंदोलनों से निपटने की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। बीपीआरएंडडी ने स्वतंत्र भारत में अब तक हुए तमाम आंदोलनों से संबंधित सूचना राज्य सरकारों से मांगी है। नरेंद्र मोदी सरकार किसी प्रतिरोध या जन आंदोलन को जायज नहीं मानती, यह तो जग-जाहिर… Continue reading शासक इतने क्यों भयभीत?

कहानियां बिखरने का वर्ष

इस वर्ष भारत के चमकने की कथा डगमगाती नजर आईं। साल खत्म होते-होते भारतवासियों का यह विश्वास डोलता दिखा है कि देश के उदय को अब रोका नहीं जा सकता और हम विकसित देश एवं वैश्विक महाशक्ति बनने की राह पर हैं। साल 2025 आज यह अहसास छोड़कर हमसे विदा हो रहा है कि जिन… Continue reading कहानियां बिखरने का वर्ष

पुतिन की शर्तों पर?

यूक्रेन में जल्द लड़ाई रुकने की संभावना नहीं है। इसका अंदाजा ट्रंप को भी है, जिन्होंने जेलेन्स्की के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि शांति समझौते पर पूरी सहमति बनने में अभी कई हफ्ते लग सकते हैं।  वोलोदीमीर जेलेन्स्की इस उम्मीद के साथ डॉनल्ड ट्रंप से मिलने गए कि यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के… Continue reading पुतिन की शर्तों पर?

नाकामियों ने उपजी हताशा

कांग्रेस की मुश्किल यह है कि गुजरे 12 साल में वह नरेंद्र मोदी के उछाले मुद्दों पर प्रतिक्रिया जताने से आगे का कोई कार्यक्रम तय नहीं कर पाई है। उधर बार-बार चुनावी हार से संगठन में हताशा गहरा गई है। दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की संगठन संबंधी मूलभूत समस्या की ओर इशारा किया, लेकिन इसके… Continue reading नाकामियों ने उपजी हताशा

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