अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर प्रहार

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ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के खिलाफ जो तर्क दिया है, आशंका है कि वह वैसी ही दलील ग्रीनलैंड, क्यूबा, मेक्सिको और यहां तक कि कनाडा के खिलाफ भी गढ़ सकता है। इसीलिए इस हमले से अधिकांश देशों के कान खड़े हुए हैं।

डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के आसपास सैन्य दबाव कई महीनों से बना रखा था, लेकिन तब कहा गया कि यह “मादक पदार्थों की तस्करी” पर कार्रवाई के लिए है। इस बीच ट्रंप प्रशासन ने अपने देश की संसद के सामने कहा कि वेनेजुएला पर हमला करने या वहां ‘शासन परिवर्तन’ कराने का उसका कोई इरादा नहीं है। इस तरह तीन जनवरी को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर जो हमला किया, वह अमेरिका में बिना संसदीय मंजूरी के किया गया। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के अनेक सांसदों ने इसे अमेरिकी संविधान का उल्लंघन बताया है।

इस हमले के जरिए वेनेजुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति निकलस मदुरो और उनकी पत्नी को उनके निवास से उठा लिया गया। उन्हें न्यूयॉर्क लाकर उन पर मुकदमा चलाने का एलान किया गया है, जबकि इस कार्रवाई को वहां के मेयर जोहरान ममदानी ने देश के संघीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। अंतरराष्ट्रीय कानून का सर्वोपरि सिद्धांत हर देश की संप्रभुता का सम्मान है, जिसका किसी देश को उल्लंघन नहीं करना चाहिए। किसी उच्छृंखल देश के खिलाफ भी संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी से बहुपक्षीय बल के जरिए ही वैध कार्रवाई की जा सकती है। मगर इस मामले में संयुक्त राष्ट्र तो दूर, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के सहयोगी देशों की सहमति भी प्राप्त नहीं की। इस तरह वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए ‘एकतरफा कार्रवाई’ के अपने चलन को एक नए मुकाम पर ले गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य का ऐसा व्यवहार नियम आधारित विश्व व्यवस्था के लिए खुली चुनौती है। इससे दुनिया के हर हिस्से में हमलों की धमकी देने, कमजोर देश को डराने, और मनमाने ढंग से दूसरे देशों की संप्रभुता का उल्लंघन करने की प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलने का अंदेशा है। ट्रंप प्रशासन ने जिस तर्क को आधार बनाकर वेनेजुएला पर कार्रवाई की, आशंका है कि वह वैसी ही दलील ग्रीनलैंड, क्यूबा, मेक्सिको और यहां तक कि आगे चल कर कनाडा के खिलाफ भी गढ़ सकता है। इसीलिए वेनेजुएला पर हमले से अधिकांश देशों के कान खड़े हुए हैं और विश्व समुदाय के बहुत बड़े जनमत ने इसकी निंदा की है।


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