नीतीश कब छोड़ेंगे सीएम की कुर्सी?

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यह सस्पेंस खत्म नहीं हो रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कब  इस्तीफा देंगे। उनको दो इस्तीफे देने हैं। पहला तो विधान परिषद से और दूसरा मुख्यमंत्री पद से। गौरतलब है कि नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुन लिए गए और पहले से विधान परिषद के सदस्य हैं। सो, 16 मार्च से 14 दिन के अंदर उनको किसी एक सदन से इस्तीफा देना है। उनके राज्यसभा के लिए चुने जाने के 10 दिन हो गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी उनके साथ ही राज्यसभा के लिए चुने गए थे। वे पहले से विधानसभा के सदस्य हैं। उनको भी अगले चार दिन में विधानसभा से इस्तीफा देना होगा। इस बीच नीतीश कुमार फिर से अपनी पार्टी जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं।

बहरहाल, नीतीश कुम्रार ने जब राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तो कायदे से उनका इस्तीफा  औपचारिकता होनी चाहिए। लेकिन ऐसा लग रहा है कि जनता दल यू के नेता इसे ज्यादा से ज्यादा समय तक टाले रहना चाहते हैं। पहले कहा जा रहा था कि 27 या 28 मार्च को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। उसके बाद राज्यपाल उनको कार्यवाहक सीएम बने रहने को कहेंगे और फिर भाजपा अपना नेता तय करेगी, जिसे एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा। लेकिन अब कहा जा रहा है कि मामला अप्रैल में जा रहा है। यानी मार्च में नीतीश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे। उनको विधान परिषद से और नितिन नबीन को विधानसभा से इस्तीफा देने की संवैधानिक मजबूरी है इसलिए वह इस्तीफा 30 मार्च से पहले हो जाएगा। लेकिन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लिए इंतजार करना होगा।

हालांकि सबसे दिलचस्प बात यह है कि भाजपा चाहती है कि जल्दी से जल्दी नीतीश का इस्तीफा हो जाए लेकिन ऊपर से वह कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है। भाजपा के एक जानकार नेता का कहना है कि पार्टी एक एक कदम फूंक फूंक कर रख रही है और नीतीश के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की प्रक्रिया भी इंच इंच करके आगे बढ़ रही है। उनका राज्यसभा के लिए चुना जाना एक कदम था तो विधान परिषद से इस्तीफा देना दूसरा कदम होगा। उसके बाद वे सीएम पद से इस्तीफा देंगे। कब इस्तीफा देंगे इसका सस्पेंस है। उनकी पार्टी के नेता श्रवण कुमार ने यह कह कर सस्पेंस बढ़ा दिया कि वे छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं होगा। एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो रहा है और सरकार को कामकाज भी शुरू करना है, जो पिछले छह महीने से पूरी तरह से बंद है। सरकार के पास पैसे नहीं हैं। सबके भुगतान रूके हैं और कोई नया काम नहीं शुरू हो रहा है। नीतीश कुमार अब लेम डक मुख्यमंत्री हैं। इसलिए उनके हटे बगैर कामकाज नहीं शुरू होगा। इसके लिए उनका हटना जरूरी है। दूसरा सस्पेंस पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर है। बिहार में बदलाव चुनाव से पहले हो या बाद में, इसके नफा नुकसान पर विचार हो रहा है। अगर पहले बदलाव हो गया तो बंगाल में भाजपा को कई तरह से फायदा होगा। जो हो, मार्च की डेडलाइन निकल गई है।


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