भारतीय जनता पार्टी के बड़े और चर्चित नेताओं में राम माधव संभवतः इकलौते नेता हैं, जो आज तक सांसद नहीं हुए। पार्टी के सारे प्रवक्ता या महामंत्री रहे नेता सांसद बन चुके हैं। जो लोकसभा नहीं जीत सका उसको राज्यसभा भेजा गया। राम माधव न लोकसभा लड़े और न राज्यसभा का चुनाव लड़ा। उलटे भरपूर मेहनत करने के बावजूद उनको किनारे कर दिया गया था। लंबे समय के बाद उनकी मुख्यधारा की राजनीति में वापसी हुई है। वे भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में महामंत्री बनाए गए हैं। दो दिन पहले बुधवार को महामंत्रियों के कामकाज का बंटवारा हुआ तो राम माधव को तमिलनाडु का प्रभारी बनाया गया और साथ ही उत्तराखंड का भी प्रभार दिया गया।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में पांच महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। वहां राज्यसभा की एक सीट खाली हो रही है। क्या इस सीट पर राम माधव को भेजा जा सकता है? यह बड़ा सवाल है क्योंकि चुनाव से पहले किसी बाहरी नेता को राज्यसभा भेजने का असर चुनाव पर पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के पास ज्यादा सीटें हैं लेकिन वहां भी चुनाव है और वहां से भी किसी बाहरी को भेजने का फैसला शायद नहीं हो। हालांकि जानकार नेताओं का कहना है कि हरदीप पुरी का नाम अगर कटता है तो राम माधव वहां से जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश के एक जानकार नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि राम माधव के नाम में राम भी है और कृष्ण भी, इसलिए उनको उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजने में कोई समस्या नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि उनको सांसद बनना है सवाल सिर्फ इतना है कि अभी बनते हैं या थोड़ा और इंतजार करना पड़ता है?
