नरमी की गुंजाइश नहीं

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डिजिटल फ्लेटफॉर्म पर अगर धतूरे जैसे प्रतिबंधित बीज, और भ्रामक दावों वाले खाद्य पदार्थ खुलेआम बिक रहे हों, तो उसे सीधे तौर पर आम इनसान की सेहत के साथ खिलवाड़ ही समझा जा सकता है।

अमेजन, स्विजी, इंस्टामार्ट, बिग-बास्केट आदि जैसी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की कार्रवाई को एक अति-आवश्यक कदम माना जाएगा। डिजिटल फ्लेटफॉर्म पर अगर धतूरे जैसे प्रतिबंधित बीज, और भ्रामक दावों वाले खाद्य पदार्थ खुलेआम बिक रहे हों, तो उसे सीधे तौर पर आम इनसान की सेहत के साथ खिलवाड़ ही समझा जा सकता है। डिलिवरी ऐप्स की संचालक कंपनियों को कोई समाज ऐसा आम जोखिम पैदा करने की इजाजत नहीं दे सकता। दरअसल, ये पूरा प्रकरण क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों की गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी खामियों को उजागर करता है। या यह भी कहा जा सकता है कि यह नियम-कानूनों के प्रति इन कंपनियों की लापरवाही की ठोस मिसाल है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियां अक्सर तर्क देती हैं कि वे सिर्फ ‘इंटरमीडिएटरी’ यानी विक्रेता एवं ग्राहक के बीच खरीद-बिक्री का माध्यम हैं। लेकिन, गौरतलब है कि ये कंपनियां धुआंधार विज्ञापनों से अपना ब्रांड मूल्य बनाती हैं, जिसका आधार खरीदारों का भरोसा है। इसलिए किसी ऐप पर हानिकारक पदार्थ बिकें, तो उसकी जवाबदेही प्लेटफॉर्म संचालक कंपनी की भी बनती है। अतः यह अनिवार्य हो गया है कि किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता, उस पर लिखे दावों और अपनाए गए सुरक्षा मानकों के बारे में ऐप संचालक कंपनियों को भी जवाबदेह बनाया जाए। भ्रामक मार्केटिंग के जरिए कथित स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री का चलन हाल में काफी बढ़ा है। उपभोक्ताओं में सेहत के प्रति नई आई संवेदनशीलता का गलत फायदा अनेक कंपनियां उठा रही हैं। इसीलिए इसे रोकना अनिवार्य हो गया है।

एफएसएसएआई ने अपने ताजा कदम से यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रामक दावों के जरिए हानिकारक पदार्थों की मार्केटिंग दंडनीय अपराध है। बहरहाल, यह कार्रवाई महज एक शुरुआत है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तेज गति से हुए प्रसार के मद्देनजर महज बिक्री रोकना या प्रतीकात्मक जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं होगा। बल्कि इसके लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाने चाहिए, ताकि ई-कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ता सुरक्षा से कोई समझौता न हो। फिलहाल, एफएफएसएआई ने ऐसी शुरुआत की है, जिसे आगे ले जाने का दायित्व सरकार और संसद पर है।


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