बेंच के बाद बेंच!

Categorized as संपादकीय

केंद्र ने विधेयक के जरिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा, तो उसके बाद लगभग तीन साल गुजर चुके हैं। अब नई बेंच बनेगी, तो जैसा तजुर्बा है, उसका फैसला आने में अभी कई और वर्ष गुजरेंगे।

मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय की। पांच जजों की संविधान पीठ ने व्यवस्था दी कि ये नियुक्तियां तीन सदस्यीय समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश, एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल रहेंगे। नरेंद्र मोदी सरकार को यह निर्णय पसंद नहीं आया, तो उसने उसी वर्ष दिसंबर में संसद से विधेयक पारित करवा कर समिति की संरचना बदल दी। इसके तहत प्रावधान किया गया कि नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त एक कैबिनेट मंत्री, और नेता विपक्ष रहेंगे। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तो न्यायालय ने वह याचिका दो जजों की बेंच को सौंप दी।

उस पीठ का बंटा हुआ फैसला बुधवार को आया। एक जज- न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने याचिका में पेश दलील को जायज मानते हुए कहा कि उपरोक्त कानून ने नियुक्ति समिति में सत्ता पक्ष का बहुमत कायम कर दिया है, जिससे वहां नेता विपक्ष की मौजूदगी सजावटी बन भर रह गई है। वे इस तर्क से भी सहमत हुए कि मौजूदा स्वरूप में समिति ‘स्वतंत्र’ मालूम नहीं पड़ती। लेकिन दूसरे जज जस्टिस एस.सी. शर्मा ने सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश दलील से सहमति जताई कि इस मामले से महत्त्वपूर्ण कानूनी प्रश्न जुड़े हुए हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की अधिक बड़ी बेंच ही फैसला दे सकती है।

तो अब मामला फिर से प्रधान न्यायाधीश के पास चला गया है। वे तय करेंगे कि क्या इस मुद्दे पर फिर से संविधान पीठ बने? केंद्र ने जब विधायी पहल के जरिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा था, तो उसके बाद लगभग तीन साल गुजर चुके हैं। अब नई बेंच बनेगी, तो जैसा तजुर्बा है, उसका फैसला आने में अभी कई और वर्ष गुजरेंगे। इस बीच तमाम चुनाव सरकार के मन-माफिक बने निर्वाचन आयोग की देखरेख में होते रहेंगे। अतः सामान्य स्थितियों में फैसले का इंतजार असहनीय महसूस नहीं होता। लेकिन निर्वाचन आयोग जैसी शिकायतों से घिरता चला गया है, उसको लेकर जैसे संदेह सार्वजनिक दायरे में मौजूद हैं, उन्हें देखते हुए बहुत बड़े जनमत को संभावित देर अंधेर का कारण बनती मालूम पड़ेगी।


Previous News

More News

यूपी से भाजपा के कितने दावेदार

September 25, 2026

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो गई है। उत्तराखंड की एक सीट पर भी चुनाव होगा और पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा। लेकिन सबकी नजर उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर है। राज्य में अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से राज्यसभा…

हरदीप पुरी की वापसी होगी या नहीं?

September 25, 2026

राज्यसभा चुनावों की घोषणा के बाद जिस एक चेहरे को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं वह हरदीप सिंह पुरी का है। वे नरेंद्र मोदी की सरकार में पेट्रोलियम मंत्री हैं और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। पांच महीने में पंजाब में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। ध्यान रहे पुरी केंद्र…

राम माधव का इंतजार क्या खत्म होगा?

September 25, 2026

भारतीय जनता पार्टी के बड़े और चर्चित नेताओं में राम माधव संभवतः इकलौते नेता हैं, जो आज तक सांसद नहीं हुए। पार्टी के सारे प्रवक्ता या महामंत्री रहे नेता सांसद बन चुके हैं। जो लोकसभा नहीं जीत सका उसको राज्यसभा भेजा गया। राम माधव न लोकसभा लड़े और न राज्यसभा का चुनाव लड़ा। उलटे भरपूर…

राजस्थान की क्रिकेट राजनीति

September 25, 2026

देश भर में क्रिकेट हो या फुटबॉल या दूसरा कोई भी खेल उनका प्रबंधन नेताओं के हाथ में ही है। एकाध अपवाद हो सकता है कि किसी खिलाड़ी को प्रबंधन में रखा गया हो लेकिन वह भी किसी न किसी राजनीतिक दल की कृपा से ही हुआ होगा। पहले कांग्रेस के हाथ में ताकत थी…

एसआईआर की सफाई में फंसते मतदाता !

September 25, 2026

उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात समेत बारह राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की संयुक्त सूची में भी करोड़ों नाम घटे। उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी संख्या में कटौती बताई गई, पश्चिम बंगाल में भी दस प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज हुई। वहीं महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक नाम बाहर दिखे, कर्नाटक में एक करोड़ से…

logo