नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मनमाने तरीके से चुनाव आयोग को चलाने के ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद अब मामला अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर की है तो दो याचिकाएं बॉम्बे हाई कोर्ट में दर्ज की गई हैं। दोनों अदालतों में दायर याचिकाओं मे एसआईआर की प्रक्रिया को रद्द करने और मतदाताओं के नाम जोड़ने व हटाने के काम में ज्यादा पारदर्शिता लाने का निर्देश देने की अपील की गई है।
महाराष्ट्र हाई कोर्ट में दर्ज दो याचिकाओं में महाराष्ट्र की एसआईआर का विरोध किया गया है। इनमें एसआईआर की संवैधानिक वैधता, प्रक्रिया और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। अखबार की रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ताओं का दावा है कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर से जुड़े कई आदेश जारी किए। दोनों याचिकाओं में इन आदेशों को रद्द करने और चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, जारी दिशा निर्देशों और साफ्टवेयर में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई सामूहिक निर्णय लेने की वैधानिक अनिवार्यता का उल्लंघन करती है। यह याचिका अधिवक्ता चांद कुरैशी के जरिए अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को असंवैधानिक और अमान्य घोषित किया जाए।
