सरकार क्यों इतनी जल्दबाजी में है?

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यह लाख टके का सवाल है कि नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन करके महिला आरक्षण 2029 से ही लागू करने और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करने की जल्दबाजी सरकार क्यों कर रही है? सबसे पहले तो सरकार को संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरुरत होगी। संविधान संशोधन के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरुरत है, जो उसके पास नहीं है। इसलिए मजबूरी है कि उसे विपक्ष से बात करनी पड़ रही है। ध्यान रहे सरकार के पास 293 सांसदों का समर्थन है, जो 273 के साधारण बहुमत से थोड़ा ज्यादा है। सो, बिना विपक्ष के समर्थन के संविधान संशोधन बिल नहीं पास होगा। तभी विपक्ष ने भी नखरे दिखाए और सोमवार की बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बाद में अलग से विपक्षी पार्टियों की बैठक की।

बहरहाल, कहा जा रहा है कि सरकार जाति जनगणना के आंकड़े से बचना चाह रही है इसलिए उससे पहले ही महिला आरक्षण लागू किया जा रहा है। हालांकि अभी यह समझना मुश्किल है कि जाति गणना के आंकड़ों को किस तरह से महिला आरक्षण और सीटों की संख्या में बढ़ोतरी से जोड़ा जाता। फिर भी जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से ऐसा कहा जा रहा है कि हजारों जातियां हैं और लाखों उप जातियां हैं, जिन सबको कंसिडर किया गया तो जटिलता बढ़ेगी। जो हो अगले साल होने वाली जनगणना में जातियों की गिनती होने वाली है और उसके आंकड़े आने से पहले सरकार सीटों की संख्या बढ़ा रही है और महिला आरक्षण को लागू कर रही है। तभी कहा जा रहा है कि भाजपा की समर्थक अगड़ी जातियों की नाराजगी को सरकार समझ रही है। साथ ही कांग्रेस और अन्य प्रादेशिक पार्टियों की ओर से जातियों की गोलबंदी भी समझ में आ रही है। इसलिए अगले चुनाव से पहले जाति निरपेक्ष आधी आबादी यानी 50 फीसदी महिलाओं को साथ जोड़ने की कोशिश शुरू हो गई। पहले लग रहा था कि भाजपा 2029 को लेकर बहुत भरोसे में है इसलिए 2034 से महिला आरक्षण लागू होगा। लेकिन वह भरोसा टूटा दिख रहा है। तभी आननफानन में परिसीमन कानून में बदलाव के लिए संशोधन लाया जा रहा है और परिसीमन आयोग बना कर 2011 की जनगणना के आधार पर ही सीटों की बढ़ोतरी करने का प्रयास हो रहा है।


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