बिना लागू हुए कानून में संशोधन

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भारत के इतिहास में यह संभवतः पहली बार हो रहा है कि सरकार ने एक कानून बनाया और उसे लागू करने से पहले ही उसमें संशोधन किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि कानून बनाने वाली सरकार बदल गई और कोई नई सरकार आकर कानून में संशोधन कर रही है। जिस सरकार ने कानून बनाया वही उसे लागू करने से पहले बदलने जा रही है। यह भी दिलचस्प संयोग है कि भारत के नए संसद भवन में जो पहला कानून बना उसे लागू करने से पहले ही बदला जा रहा है। किसी भी सरकार की अदूरदर्शिता की इससे बड़ी मिसाल नहीं हो सकती है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़े धूम धड़ाके से 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन किया था और सबसे पहला कानून बनाया गया था, नारी शक्ति वंदन कानून। अब मोदी सरकार इस कानून में संशोधन करने जा रही है और उसके लिए दो विधेयक लाने की तैयारी की जा रही है।

असल में सितंबर 2023 में जो नारी शक्ति वंदन कानून बना उसमें लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया। लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन के साथ जोड़ दिया गया। यानी पहले जनगणना होगी और उसके आंकड़े के आधार पर परिसीमन होगा और तब महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। कानून के इस प्रावधान को लेकर 2023 में भी बड़ी आलोचना हुई थी। लेकिन तब सरकार ने संभवतः यह सोचा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय सीटों की संख्या बढ़ाने की समय सीमा बढ़ाई गई थी उसे बदलने के लिए संविधान संशोधन नहीं करना होगा। उस समय सीमा के मुताबिक 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाना था। सरकार को पता था कि 2021 वाली जनगणना 2027 से पहले नहीं हो पाएगी। इसलिए बिना संविधान में संशोधन किए महिला आरक्षण का कानून बना दिया गया और उसे अगली प्रस्तावित जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया।

अब सरकार ने जनगणना की घोषणा कर दी है। इस साल पहले चरण का काम होगा, जिसमें मकानों की गिनती होगी और अगले साल लोगों की गिनती होगी। लेकिन उसके आंकड़े आने में समय लगेगा और उसके बाद परिसीमन आयोग बना कर उसके आधार पर लोकसभा की सीटें बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने का काम 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले किसी हाल में संभव नहीं हो पाएगा। लेकिन पता नहीं किस कारण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लगा कि अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 में ही महिला आरक्षण लागू होना चाहिए। इसलिए सरकार ने तत्काल पहल शुरू कर दी है।

सहयोगी पार्टियों के साथ बैठक हो गई है और विपक्ष से भी बात की जा रही है। सरकार संसद के चालू सत्र में ही दो विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। संविधान संशोधन के जरिए महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग कर दिया जाएगा। इसके बाद एक दूसरा सामान्य विधेयक होगा, जिससे परिसीमन के नियमों में बदलाव किया जाएगा। कहा जा रहा है कि सरकार लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करेगी। इस तरह लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ कर 816 हो जाएगी। इसमें से 33 फीसदी यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसे सबसे पहले 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके साथ होने वाली आंध्र प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्यों की विधानसभा में भी लागू किया जाएगा।


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