जो स्पष्ट और अस्पष्ट

अमेरिका में टैरिफ 18 प्रतिशत होने से भारत के श्रम-केंद्रित उद्योगों को राहत मिलेगी। लेकिन अमेरिका की भू-राजनीतिक रणनीतियों से जुड़ी शर्तें डील में शामिल हुईं, तो आर्थिक के साथ-साथ भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी वो हानिकारक बात होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज… Continue reading जो स्पष्ट और अस्पष्ट

बजट दायरे से बाहर

सालाना बजट आज महज वित्तीय विवरण, कर दरों में हेरफेर, खर्च के लक्ष्यों की घोषणा और जहां-तहां कुछ प्रोत्साहनों के एलान का दस्तावेज भर रह गया है। बुनियादी आर्थिक समस्याओं के हल की बात उसके दायरे से बाहर हो चुकी है। कांग्रेस की राय में केंद्रीय बजट अर्थव्यवस्था की बुनियादी चुनौतियों से आंख मिलाने में… Continue reading बजट दायरे से बाहर

पाकिस्तान की सियासी चाल

यह लाइन भारत की रही है कि आतंकवाद और क्रिकेट साथ-साथ नहीं चल सकते। मगर दोनों देशों के बीच मैच चलते रहें, इसकी राह भी निकाली जाती रही है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा करने में बीसीसीआई सहायक बनती आई है। जो फैसला भारत को लेना चाहिए था, वह पाकिस्तान ने किया है। दोनों देशों की… Continue reading पाकिस्तान की सियासी चाल

बजट का सीधा गणित

केंद्रीय आमदनी में कॉरपोरेट टैक्स का हिस्सा 18 फीसदी ही रह गया है, जबकि आम लोगों का कर योगदान 46 फीसदी पहुंच गया है। यह प्रतिगामी सूरत है। बजट से साफ है कि इसमें सुधार का कोई प्रयास नहीं किया गया है। केंद्रीय बजट में 2026-27 में 53,47,315 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।… Continue reading बजट का सीधा गणित

सैद्धांतिक रूप से अहम

आरटीई कानून लागू हुए 16 वर्ष गुजर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से जाहिर है कि सरकारों ने उस धारा के तहत अपने दायित्व को नहीं निभाया। यानी लड़कियों के लिए अलग शौचालय की जरूरत पूरी नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट की इस व्याख्या का ऊंचा सैद्धांतिक महत्त्व है कि मासिक धर्म संबंधी… Continue reading सैद्धांतिक रूप से अहम

अपनी कमजोरी की मार!

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा चुनौतियों के बरक्स राज्य को अलग ढंग से संगठित एवं सक्षम बनना होगा। साथ ही कॉरपोरेट सेक्टर को बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। परंतु ऐसा कैसे और कब होगा, असल मुद्दा यह है। साल 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने माना है कि भारतीय रुपया बदलती… Continue reading अपनी कमजोरी की मार!

साख से समझौता नहीं

अनुसंधान एवं परीक्षण की गतिविधियों को नौकरशाही सुस्ती से मुक्त करना सही दिशा में कदम है। लेकिन इसे सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि दवा कंपनियां नियमों में दी जा रही रियायत का बेज़ा फायदा ना उठाएं। भारत सरकार ने नई दवाओं के विकास के लिए हरी झंडी देने के नियम आसान बनाए हैं। इसके… Continue reading साख से समझौता नहीं

मजबूत संदेश के साथ

डॉनल्ड ट्रंप के मूड के हिसाब से कभी बंद, तो कभी खुलते अमेरिकी बाजार के दरवाजों से परेशानी के दौर में भारत और ईयू ने उस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाया है, जो 19 वर्षों से खिंच रही थी। डॉनल्ड ट्रंप के प्रहार झेल रही दुनिया में भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने मुक्त व्यापार… Continue reading मजबूत संदेश के साथ

अविलंब करें समाधान

समस्या आनुपातिक समानता (equity) के नाम पर दशकों से चल रही वो राजनीति है, जिसमें न्याय की व्यापक समझ को तिलांजलि दे दी गई है। इस सोच ने समाज को पुरानी जकड़नों में और भी मजबूती से बांध डाला है। उच्च शिक्षण संस्थानों में कथित जातीय भेदभाव को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग… Continue reading अविलंब करें समाधान

ट्रंप प्रशासन की व्यग्रताएं

ट्रंप की नीतियों ने विभिन्न देशों को नए साथी और नए अवसर ढूंढने के लिए मजबूर किया है। जब अमेरिका ने अपने साथ सम्मानजनक ढंग से कारोबार के रास्ते बंद कर दिए हैं, तो लाजिमी है, देश नए विकल्प की तलाश करेंगे। भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनने… Continue reading ट्रंप प्रशासन की व्यग्रताएं

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