साख से समझौता नहीं

Categorized as संपादकीय

अनुसंधान एवं परीक्षण की गतिविधियों को नौकरशाही सुस्ती से मुक्त करना सही दिशा में कदम है। लेकिन इसे सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि दवा कंपनियां नियमों में दी जा रही रियायत का बेज़ा फायदा ना उठाएं।

भारत सरकार ने नई दवाओं के विकास के लिए हरी झंडी देने के नियम आसान बनाए हैं। इसके लिए नई औषधि एवं क्लीनिकल ट्रायल के 2019 में बने नियमों में बदलाव किया गया है। मकसद नई दवाओं के परीक्षण में लगने वाले समय को घटाना और संबंधित अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। पहले ऐसे कार्यों के लिए केंद्रीय औषधि प्रमाणन नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से लाइसेंस हासिल करना अनिवार्य था। अब कंपनियां कुछ श्रेणियों की दवाओं को छोड़कर बाकी सभी मामलों में सीडीएससीओ को महज ऑनलाइन सूचना देकर परीक्षण शुरू कर सकेंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इस बदलाव से कम-से-कम 90 दिन की बचत होगी।

दवा कंपनियां लंबे समय से ऐसे बदलाव की मांग कर रही थीं। विनियमन प्रक्रिया की धीमी गति को वे अपने लिए बड़ी रुकावट मानती रही हैं। अतः अनुसंधान एवं परीक्षण की गतिविधियों को नौकरशाही सुस्ती से मुक्त करना सही दिशा में कदम है। लेकिन इसे सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि कंपनियां नियमों में ढीलेपन का बेज़ा फायदा ना उठाएं। हालांकि भारतीय दवा उद्योग की दुनिया में ऊंची साख है, लेकिन हाल के वर्षों में कंपनियों द्वारा विनियमन प्रक्रिया में ढिलाई का लाभ उठाने के कई मामलों सामने आए हैं। कफ सिरप जैसी दवाओं से मिलावट की घटनाओं से भारतीय औषधि उद्योग पर कलंक लगा है। आम धारणा है कि भारत में निगरानी की व्यवस्था पश्चिमी देशों में मौजूद विनियम से कमजोर है।

इसी कारण भारत में बनी जेनरिक दवाओं को ब्रांडेड दवाओं से अक्सर कमतर समझा जाता है। इसके बावजूद भारत में बनी दवाओं और वैक्सीन का दुनिया में बहुत बड़ा बाजार है, तो उसकी वजह इनका किफायती होना है। दवा उत्पादन के लिहाज से भारत दुनिया में तीसरे और मूल्य के लिहाज से 14वें स्थान पर आता है। देश में तीन हजार से ज्यादा दवा कंपनियां और साढ़े दस हजार फैक्टरियां हैं। लगभग 60 जेनरिक ब्रांड यहां उत्पादित होते हैँ। इस कारोबार ने दशकों के दरम्यान इतना विशाल आकार ग्रहण किया है, तो उसमें विश्वसनीयता एक निर्णायक पहलू रही है। नए बदलावों के साथ इस पर कोई समझौता नहीं हो, इसे अवश्य सुनिश्चित करना होगा।


Previous News Next News

More News

प्रहलाद जोशी के जरिए बड़ा संदेश

July 29, 2026

ऐसी चर्चा थी कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देंगे तो डॉक्टर जितेंद्र सिंह को उनकी जगह शिक्षा का प्रभार दिया जाएगा। यह अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान वे सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। प्रधानमंत्री आवास के सामने राहुल गांधी के…

अब ई-20 पार्टी बन कर तैयार है

July 29, 2026

सरकार अभी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से मिले जख्मों को सहला ही रही है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 पेट्रोल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए ई-20 पार्टी का गठन हो गया है। इस पार्टी को सोशल मीडिया में पर्याप्त समर्थन भी मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी…

क्या दिपके राजनीतिक पार्टी बनाएंगे?

July 29, 2026

अभिजीत दिपके और उनके नजदीकी लोग जैसे आशुतोष रांका और सौरव दास दावा कर रहे हैं कि अभी राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है और न चुनाव लड़ना है। लेकिन असल में दिपके और उनकी टीम राजनीतिक दल बनाएंगे। ध्यान रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग खास कर…

पीके से पूरा एनडीए लड़ रहा है

July 29, 2026

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए दुःस्वप्न साबित हो रहा है। भाजपा के कई नेता कह रहे हैं कि नितिन नबीन को सीट से इस्तीफा नहीं देना चाहिए थे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बाद वे राज्यसभा चले गए और उन्होंने बांकीपुर सीट से इस्तीफा दे दिया। इसकी वजह…

कॉकरोच: एक शब्द का बल

July 29, 2026

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने दिया था। उन के शब्दों ने हिटलर के सामने पस्त हो रहे इंग्लैंड को बल दिया। इस हद तक कि कई यूरोपीय देशों को टिके रह कर लड़ने का हौसला मिला।…. चर्चिल ने अंग्रेजी भाषा को बुलाया और उसे युद्धभूमि में उतार दिया।” आज कम…

logo