एनएफएचएस-6 डेटा को लेकर जेपी नड्डा ने खड़गे को घेरा

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर तीखा हमला करते हुए उनकी स्वास्थ्य संबंधी टिप्पणियों को अधूरी जानकारी पर आधारित बताया। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर नड्डा ने कहा कि अधूरी जानकारी जन-स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम पैदा कर सकती है। उन्होंने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों का बचाव किया। 

नड्डा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “खड़गे जी की अधूरी जानकारी खतरनाक है। जन-स्वास्थ्य का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। चुनिंदा जानकारी से राजनीति तो सध सकती है, लेकिन देश का भला तथ्यों से ही होता है।

केंद्रीय मंत्री ने एनएफएचएस-3 (2005-06) और एनएफएचएस-6 के आंकड़ों की तुलना करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 43.9 फीसदी से बढ़कर 76.2 फीसदी हो गया है। संस्थागत प्रसव 38.7 फीसदी से बढ़कर 90.6 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 46.6 फीसदी से बढ़कर 91.3 फीसदी हो गया है।

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उन्होंने कहा कि पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1 फीसदी दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9 फीसदी से बढ़कर 60.2 फीसदी तक पहुंच गया है। वहीं, बच्चों में कुपोषण के प्रमुख संकेतकों में से एक स्टंटिंग की दर 48 फीसदी से घटकर 29.3 फीसदी रह गई है।

नड्डा ने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि लाखों माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की कहानी हैं। उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल को लेकर भी आलोचना की और उसे नीतिगत विफलता का दौर बताया।

विवाद की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक पोस्ट से हुई थी। खड़गे ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार एनएफएचएस-6 के कुछ आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार न सिर्फ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में महिलाओं और बच्चों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि अहम डेटा को भी दबा रही है।

खड़गे ने दावा किया कि हर पांच में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है, एक-तिहाई बच्चों का वजन कम है और 6 से 23 महीने आयु वर्ग के 84 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। साथ ही, उन्होंने सरकार पर चुनिंदा आंकड़े प्रस्तुत कर असफलताओं को छिपाने का आरोप लगाया।

Pic Credit : ANI


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